9 june 2026
मध्य प्रदेश की बहुप्रतीक्षित नर्मदा जल परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। लगभग 17 वर्षों से निर्माणाधीन देश की सबसे लंबी जल सुरंग का कार्य 98 प्रतिशत पूरा हो चुका है और अधिकारियों के अनुसार जून 2026 के अंत तक इसे पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होते ही बरगी बांध का पानी पहली बार रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के खेतों तक पहुंचेगा, जिससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
17 साल की कठिन यात्रा अब मंजिल के करीब
इस सुरंग का निर्माण सामान्य इंजीनियरिंग परियोजना नहीं था। जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे बन रही इस विशाल संरचना ने इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने लगातार नई चुनौतियां खड़ी कीं। कई बार खुदाई के दौरान मशीनों ने काम करना बंद कर दिया, कुछ स्थानों पर मीथेन गैस का रिसाव मिला, तो कहीं भूजल के दबाव ने निर्माण कार्य को प्रभावित किया। इन बाधाओं के कारण परियोजना की समय-सीमा कई बार बढ़ी, लेकिन अब अधिकांश तकनीकी चुनौतियों को पार कर लिया गया है।
चार जिलों की कृषि को मिलेगा नया जीवन
परियोजना पूरी होने के बाद विंध्य क्षेत्र के चार जिलों—रीवा, सतना, मैहर और पन्ना—की लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्तमान में इन क्षेत्रों के कई किसान वर्षा पर निर्भर खेती करते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद फसल विविधीकरण, उत्पादन वृद्धि और किसानों की आय में सुधार की संभावना बढ़ जाएगी।
कटनी को भी मिलेगा पेयजल लाभ
यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से कटनी जिले के कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को भी मजबूती मिलेगी। भविष्य में बढ़ती आबादी और जल संकट की चुनौतियों को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विंध्य क्षेत्र के विकास में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। सिंचाई क्षेत्र के विस्तार से ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को स्थायी राहत मिल सकेगी। लंबे इंतजार के बाद परियोजना का अंतिम चरण पूरा होने जा रहा है, जिसे विंध्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
30 जून तक पूरा होने का लक्ष्य
नर्मदा घाटी विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार सुरंग निर्माण और उससे जुड़े अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। शेष तकनीकी और परीक्षण संबंधी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। यदि निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्य पूरा होता है, तो 30 जून 2026 के बाद क्षेत्र के किसानों को नर्मदा जल का प्रत्यक्ष लाभ मिलना शुरू हो सकता है।
यह परियोजना केवल एक जल सुरंग नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदों से जुड़ा विकास अभियान है, जो वर्षों की चुनौतियों के बाद अब वास्तविकता बनने जा रहा है।

