13 june 2026
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड पर शनिवार की सुबह गर्व, अनुशासन और भावनाओं से भरे अनेक यादगार क्षणों की साक्षी बनी। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में आयोजित 158वीं पासिंग आउट परेड में 515 जेंटलमैन कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार कर सैन्य जीवन की नई शुरुआत की। इसके साथ ही वे भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में शामिल हो गए।
इस बार की परेड कई कारणों से विशेष रही। पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला सैन्य अधिकारियों को भी कमीशन प्रदान किया गया। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बन गई। परेड के दौरान मौजूद हजारों दर्शकों और परिजनों ने इन महिला अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए तालियों से स्वागत किया।
देशभक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम
सुबह निर्धारित समय पर शुरू हुई परेड में कैडेट्स ने शानदार कदमताल और सैन्य अनुशासन का प्रदर्शन किया। परेड मैदान में एक जैसी वर्दी, एक जैसी चाल और राष्ट्रसेवा के जज्बे से ओतप्रोत कैडेट्स का प्रदर्शन हर किसी को प्रभावित कर रहा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चैटवुड भवन से परेड की सलामी ली और जवानों के उत्साह की सराहना की।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में कैडेट्स के अभिभावक भी उपस्थित रहे।
‘अंतिम पग’ ने बदली पहचान
आईएमए की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा ‘अंतिम पग’ मानी जाती है। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को पार करने के बाद जब कैडेट्स इस अंतिम पग को पार करते हैं, तभी वे सेना के अधिकारी कहलाते हैं। जैसे ही 515 कैडेट्स ने यह कदम पार किया, पूरा परेड मैदान तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
कई अभिभावकों की आंखें खुशी और गर्व से नम हो गईं। उनके लिए यह केवल एक परेड नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, समर्पण और सपनों के साकार होने का क्षण था।
राष्ट्रपति ने दिया सेवा और संवेदनशीलता का संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नव नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सेना केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के मूल्यों और आदर्शों की भी संरक्षक है। उन्होंने कहा कि आईएमए अपने कैडेट्स को सैन्य कौशल के साथ-साथ करुणा, संवेदनशीलता, नेतृत्व और मानवता जैसे गुण भी सिखाता है।
राष्ट्रपति ने प्रशिक्षकों और सैन्य अधिकारियों की भी सराहना की, जिन्होंने कैडेट्स को एक सक्षम और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में तैयार किया।
पुष्पवर्षा और फ्लाईपास्ट ने बढ़ाया उत्साह
परेड समाप्ति के बाद समारोह का सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला, जब हेलिकॉप्टर से नव नियुक्त अधिकारियों पर पुष्पवर्षा की गई। फूलों की वर्षा के बीच पूरा वातावरण देशभक्ति और उत्साह से भर उठा।
इसके बाद तीन सैन्य हेलिकॉप्टरों ने परेड ग्राउंड के ऊपर फ्लाईपास्ट किया। हेलिकॉप्टरों के साथ भारतीय तिरंगा, भारतीय सेना का ध्वज और आईएमए का ध्वज लहराता दिखाई दिया। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों के मन में गर्व और सम्मान की भावना को और मजबूत कर दिया।
उत्कृष्ट कैडेट्स को मिले प्रतिष्ठित सम्मान
परेड के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित भी किया गया। प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ विशाल कुमार को प्रदान किया गया, जिन्होंने अपने कोर्स में सर्वोच्च स्थान हासिल किया। प्रिंस राज को सिल्वर मेडल और तेजस भट्ट को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया।
टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में हृषभ मिश्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि टीईएस कोर्स में करन पांडे और स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स में बोधराज थापा को सम्मानित किया गया। मित्र देशों के कैडेट्स में बांग्लादेश के एक कैडेट को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट का पुरस्कार प्रदान किया गया।
सेना को मिला युवा नेतृत्व का नया बल
इस पासिंग आउट परेड के साथ भारतीय सेना को 481 नए भारतीय अधिकारी मिले, जबकि 16 मित्र देशों के 34 कैडेट भी अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में शामिल होंगे। ये युवा अधिकारी अब देश की सुरक्षा, नेतृत्व और सैन्य दायित्वों को निभाने के लिए तैयार हैं।
आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं रही, बल्कि यह देश की सैन्य परंपराओं, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और युवा नेतृत्व के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हो गई।

