देहरादून, 12 जून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयी राज्यों के सामने बढ़ती जलवायु और आपदा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार से विशेष सहायता व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य राज्यों से अलग हैं, इसलिए विकास और आपदा प्रबंधन के लिए इनके लिए अलग दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों का सिकुड़ना, अनियमित वर्षा, भूस्खलन, बादल फटने जैसी घटनाएं और अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं स्थानीय लोगों के जीवन और आजीविका पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं। ऐसे में केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से तैयारी और दीर्घकालिक रणनीति पर भी काम करने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण और खर्चीला होता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास परियोजनाओं पर अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए वित्तीय सहायता के मौजूदा ढांचे में पर्वतीय राज्यों की विशेष जरूरतों को शामिल किया जाना चाहिए।
धामी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र केवल स्थानीय आबादी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। नदियों के स्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है। ऐसे में इन क्षेत्रों की सुरक्षा और सतत विकास के लिए विशेष नीति और दीर्घकालिक निवेश समय की मांग है।
मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिमों को देखते हुए केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों की परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करेगी और उनके लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करेगी जिससे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

