7 june 2026
देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली से सिलीगुड़ी तक नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कोलकाता दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी। प्रस्तावित कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों को तेज गति वाली रेल सेवा से जोड़ेगा।
1500 किलोमीटर का सफर होगा महज 6 घंटे में
योजना के अनुसार यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 1500 किलोमीटर लंबा होगा। वर्तमान में दिल्ली से पूर्वी भारत के कई शहरों तक पहुंचने में 18 से 24 घंटे तक का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यही यात्रा लगभग 6 से 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी।
किन शहरों को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन मार्ग पर देश के कई बड़े शहर शामिल किए गए हैं। इनमें New Delhi, Lucknow, Varanasi, Patna और Siliguri प्रमुख हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार कॉरिडोर पर करीब 11 स्टेशन विकसित किए जा सकते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के कारण विभिन्न राज्यों के बीच आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के बाद अगला बड़ा कदम
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना Mumbai–Ahmedabad High-Speed Rail Project पर तेजी से काम चल रहा है। उसके बाद दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर को भारत के सबसे महत्वपूर्ण रेल बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल माना जा रहा है। यह परियोजना पूर्वी भारत को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से अत्याधुनिक रेल संपर्क प्रदान करेगी।
पश्चिम बंगाल में रेलवे निवेश पर भी जोर
रेल मंत्री ने पश्चिम बंगाल में रेलवे से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को गति देने के लिए बड़े निवेश की बात भी कही। इससे राज्य में रेल ढांचे के आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष: दिल्ली से सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि परियोजना निर्धारित समय पर पूरी होती है, तो उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

