1 june 2026
डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ा बदलाव लागू हो चुका है। अब UPI के जरिए किसी व्यक्ति या व्यापारी को भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर उसी व्यक्ति का नाम दिखाई देगा, जो उसके बैंक खाते में आधिकारिक रूप से दर्ज है। इस नए नियम का उद्देश्य ऑनलाइन ठगी, फर्जी UPI आईडी और गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने जैसी समस्याओं को कम करना है। यह व्यवस्था NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के निर्देशों के बाद लागू की गई है।
पहले कैसे होता था पेमेंट?
अब तक कई UPI ऐप्स में भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति का नाम अलग-अलग तरीकों से दिखाई देता था। कई बार नाम मोबाइल कॉन्टैक्ट से लिया जाता था, कई बार QR कोड में दर्ज नाम दिखता था और कुछ मामलों में यूजर खुद भी डिस्प्ले नेम बदल सकता था। इसी वजह से कई लोग असली पहचान जाने बिना भुगतान कर देते थे। साइबर ठग भी इसी कमी का फायदा उठाकर मिलते-जुलते नाम या फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देते थे।
नए नियम में क्या होगा?
अब जब भी कोई व्यक्ति UPI से पैसा भेजेगा, तो भुगतान की पुष्टि करने से पहले रिसीवर का वही नाम दिखाई देगा जो बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) में दर्ज है। यानी अब किसी भी ऐप पर कस्टम नाम, निकनेम या QR कोड से लिया गया नाम प्राथमिकता नहीं पाएगा। इससे भुगतान करने वाला व्यक्ति आसानी से पहचान सकेगा कि पैसा सही व्यक्ति के खाते में जा रहा है या नहीं।
किन ऐप्स पर लागू होगा नियम?
यह बदलाव केवल किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है। PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM समेत सभी UPI प्लेटफॉर्म्स को इस नियम का पालन करना होगा। NPCI ने सभी कंपनियों को अपने सिस्टम अपडेट करने के निर्देश दिए हैं ताकि हर ट्रांजैक्शन में सत्यापित नाम ही दिखाई दे।
पिछले कुछ वर्षों में UPI से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। कई लोग केवल नाम देखकर पैसे भेज देते थे, जबकि असल बैंक अकाउंट किसी और का होता था। नए नियम के बाद ऐसी गड़बड़ियों की संभावना काफी कम हो जाएगी क्योंकि भुगतान से पहले बैंक रिकॉर्ड वाला नाम दिखेगा। इससे गलत व्यक्ति को पैसा भेजने और फर्जी अकाउंट के जरिए ठगी होने का जोखिम घटेगा।
दुकानदारों और व्यापारियों पर भी असर
यह नियम केवल व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं रहेगा। दुकानों, छोटे व्यापारियों और QR कोड के जरिए होने वाले भुगतानों में भी ग्राहक को व्यापारी का सत्यापित नाम दिखाई देगा। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
क्या बदल जाएगा आपके लिए?
पेमेंट भेजने से पहले खाताधारक का वास्तविक नाम दिखेगा।
फर्जी नाम और नकली पहचान से होने वाली ठगी कम होगी।
गलत खाते में पैसे भेजने की संभावना घटेगी।
नए नंबर या अनजान UPI आईडी पर भुगतान करना ज्यादा सुरक्षित होगा।
डिजिटल भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।
विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
फाइनेंशियल और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि UPI नेटवर्क में यह सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा सुधारों में से एक माना जा रहा है। जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पहचान सत्यापन की जरूरत भी बढ़ रही है। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार नाम दिखाने से भुगतान करने वाले को अंतिम समय पर एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच मिल जाएगी।
निष्कर्ष
UPI ने भारत में भुगतान की तस्वीर बदल दी है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा चुनौतियां भी सामने आई हैं। खाताधारक का वास्तविक नाम दिखाने वाला नया नियम डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब भुगतान करते समय केवल UPI आईडी या मोबाइल नंबर पर भरोसा करने के बजाय स्क्रीन पर दिख रहे नाम की पुष्टि करना और भी जरूरी हो जाएगा।

