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Home»उत्तराखण्ड»उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना वैश्विक मिसाल, ब्रिक्स मंच पर गूंजी सिलक्यारा और धराली की सफलता,
उत्तराखण्ड टेक्नोलॉजी देहरादून राज्य समाचार

उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना वैश्विक मिसाल, ब्रिक्स मंच पर गूंजी सिलक्यारा और धराली की सफलता,

Monika RawatBy Monika RawatJune 7, 2026No Comments3 Mins Read
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7 june 2026

देहरादून। प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी सराहना अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी होने लगी है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में तीन से पांच जून तक आयोजित ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) वर्किंग ग्रुप की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन तंत्र को उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

बैठक में शामिल सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने राज्य की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, समन्वित बचाव कार्यों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की विशेष प्रशंसा की। खास तौर पर उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली क्षेत्र में आपदा के दौरान किए गए प्रभावी प्रबंधन की चर्चा प्रमुखता से हुई।

संकट को अवसर में बदलने का उदाहरण

उत्तराखंड ने पिछले कुछ वर्षों में बादल फटने, भूस्खलन, अतिवृष्टि और हिमालयी भू-क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्राकृतिक चुनौतियों का सामना किया है। इन परिस्थितियों ने राज्य को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर सुधार और नवाचार के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप आज राज्य का मॉडल केवल देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी अध्ययन का विषय बन गया है।

ब्रिक्स बैठक में विशेषज्ञों ने माना कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड ने पूर्व चेतावनी प्रणाली, राहत एवं बचाव कार्यों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

सिलक्यारा रेस्क्यू बना चर्चा का केंद्र

बैठक के दौरान सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान को आपदा प्रबंधन और मानवीय प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। लंबे समय तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान में विभिन्न विशेषज्ञ एजेंसियों, तकनीकी टीमों और प्रशासन के बीच समन्वय ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने इसे जटिल परिस्थितियों में सफल बचाव अभियान का प्रेरणादायक मॉडल माना।

धराली आपदा प्रबंधन की भी सराहना

धराली क्षेत्र में आपदा के दौरान प्रशासन द्वारा समयबद्ध कार्रवाई, प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों में दिखाई गई तत्परता को भी बैठक में सराहा गया। विशेषज्ञों ने कहा कि आपदा के समय स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों और समुदाय की भागीदारी ने राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया।

11 देशों ने साझा किए अनुभव

तीन दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित 11 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत अवसंरचना, पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।

वैश्विक स्तर पर बढ़ी उत्तराखंड की पहचान

ब्रिक्स मंच पर मिली सराहना ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का अनुभव भविष्य में अन्य देशों और क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

उत्तराखंड का यह मॉडल दर्शाता है कि यदि तकनीक, प्रशासनिक दक्षता और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी समन्वय हो तो बड़ी से बड़ी प्राकृतिक चुनौती का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। यही कारण है कि आज उत्तराखंड आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक मंच पर एक नई पहचान बना रहा है।

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