8 june 2026
उत्तराखंड पुलिस सेवा में अपनी सख्त कार्यशैली, प्रभावी नेतृत्व और जनहित केंद्रित पुलिसिंग के लिए पहचान बनाने वाली निवेदिता कुकरेती को अब आईजी कुमाऊं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह एसडीआरएफ और गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। उनके नए दायित्व को उत्तराखंड पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
साधारण परिवार से निकलकर बनीं प्रेरणा
निवेदिता कुकरेती का जीवन संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मायो कॉलेज, अजमेर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इंद्रप्रस्थ कॉलेज से इतिहास विषय में ऑनर्स की डिग्री हासिल की।
मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं निवेदिता के पिता मायो कॉलेज में कार्यरत थे। उस समय परिवार के लिए बेटी को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर भेजना आसान निर्णय नहीं था, लेकिन परिवार ने उनकी प्रतिभा और सपनों पर भरोसा किया। वह अपने परिवार की पहली बेटी थीं जो उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर दिल्ली गईं। यही कदम आगे चलकर उनके प्रशासनिक करियर की मजबूत नींव बना।
सिविल सेवा का सपना किया साकार
उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद निवेदिता कुकरेती ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। कठिन प्रतिस्पर्धा और चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में चयनित होकर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन किया।
उनका मानना रहा है कि पुलिस सेवा केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में भरोसा और सुरक्षा का वातावरण स्थापित करने की जिम्मेदारी भी है।
देहरादून SSP रहते बनाया अलग मुकाम
जब निवेदिता कुकरेती ने देहरादून की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तब उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं। अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और पुलिस-जन संवाद को मजबूत बनाने के लिए उनके प्रयासों की व्यापक सराहना हुई।
उनके कार्यकाल में पुलिस की सक्रियता बढ़ी, शिकायतों के निस्तारण में तेजी आई और आम जनता के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि मजबूत हुई। यही कारण रहा कि उनका कार्यकाल उत्तराखंड पुलिस के प्रभावी प्रशासनिक दौरों में गिना जाता है।
आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक अनुभव का लाभ
एसडीआरएफ और गृह विभाग में विशेष सचिव के रूप में काम करते हुए निवेदिता कुकरेती ने आपदा प्रबंधन, राहत कार्यों और प्रशासनिक समन्वय में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह अनुभव बेहद अहम माना जाता है, जहां प्राकृतिक आपदाओं से निपटना प्रशासन की बड़ी चुनौती होती है।
अब कुमाऊं की सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी नजर
आईजी कुमाऊं के रूप में निवेदिता कुकरेती के सामने कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने, महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देने तथा सीमावर्ती और पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।
प्रशासनिक दक्षता, जमीनी अनुभव और अनुशासित कार्यशैली के कारण उनसे कुमाऊं मंडल में पुलिसिंग के नए मानक स्थापित करने की उम्मीद की जा रही है। उनके इस नए दायित्व को प्रदेश की पुलिस व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
निवेदिता कुकरेती की सफलता उन युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने और अब आईजी स्तर की जिम्मेदारी संभालने तक का उनका सफर मेहनत, आत्मविश्वास और समर्पण की प्रेरक कहानी है।

