31 may 2026
नैनीताल में हुई सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि वह वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल (UPNL) कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने के लिए तैयार है। हालांकि सरकार ने इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है।
सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि उपनल कर्मचारियों की जगह नई भर्तियां करने की प्रक्रिया फिलहाल वापस ले ली गई है। साथ ही सरकार ने कहा कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिया जा सकता है, लेकिन इसके बदले उन्हें अन्य अतिरिक्त मांगें नहीं उठानी होंगी।
यह मामला लंबे समय से नियमितीकरण, समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों से जुड़ा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कई कर्मचारी वर्षों से एक ही विभाग में काम कर रहे हैं, फिर भी उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने अदालत में यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2013 की नियमावली के तहत कुछ उपनल कर्मियों को नियमित किया गया था, इसलिए अन्य कर्मचारियों को भी उसी आधार पर राहत मिलनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाना चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 जून को तय की है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार अदालत के निर्देशों के बाद क्या अंतिम फैसला लेती है और कर्मचारियों को वास्तविक राहत कब तक मिलती है।
उपनल कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि न्यूनतम वेतनमान लागू होता है तो हजारों कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी। वहीं नियमितीकरण का मुद्दा अभी भी पूरी तरह से सुलझा नहीं है और इस पर आगे कानूनी एवं सरकारी स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

