6 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों, डेवलपर्स और उपभोक्ताओं को राहत देते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सोलर परियोजनाओं और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) का नया टैरिफ आदेश जारी कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में बड़े सोलर प्लांट, छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र और घरों की छतों पर स्थापित रूफटॉप सोलर परियोजनाओं से उत्पादित बिजली की दरों में किसी प्रकार की कटौती या वृद्धि नहीं की जाएगी।
आयोग के समक्ष सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली की खरीद दर को मौजूदा 4.10 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 3.96 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि सभी तकनीकी, आर्थिक और व्यावसायिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद आयोग ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और वर्तमान दरों को यथावत बनाए रखने का निर्णय लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए टैरिफ में स्थिरता बेहद आवश्यक है। यदि बिजली खरीद दरों में कमी की जाती तो कई नई परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में आयोग का यह फैसला राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार लगातार अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा को महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान टैरिफ व्यवस्था जारी रहने से निजी निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों को भविष्य की परियोजनाओं की योजना बनाने में आसानी होगी।
रूफटॉप सोलर योजना से जुड़े उपभोक्ताओं को भी इस निर्णय से राहत मिलेगी। घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगाए गए सोलर प्लांटों से उत्पादित बिजली के लिए उन्हें पहले की तरह ही निर्धारित दरों का लाभ मिलता रहेगा। इससे राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने की गति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा आयोग ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के लिए भी टैरिफ व्यवस्था निर्धारित की है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार भविष्य में सौर और पवन ऊर्जा के अधिक उपयोग के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की भूमिका बढ़ने वाली है। बीईएसएस के माध्यम से अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर जरूरत के समय उपयोग में लाया जा सकेगा, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा विकास दोनों प्राथमिकता हैं, वहां सौर ऊर्जा क्षेत्र को स्थिर नीति और निश्चित टैरिफ का लाभ मिलना आवश्यक है। आयोग के ताजा आदेश से न केवल चल रही परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में नई सौर परियोजनाओं के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार होगा।
प्रदेश में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे एक ओर जहां निवेशकों का भरोसा कायम रहेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

