8 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार अब आवास सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे होम स्टे मॉडल को नई मजबूती देने के लिए सामुदायिक होम स्टे योजना को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रदेश में चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, एडवेंचर पर्यटन और प्राकृतिक स्थलों की लोकप्रियता बढ़ने के कारण हर वर्ष लाखों पर्यटक उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे में होटल और गेस्ट हाउस के अलावा स्थानीय स्तर पर रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी बढ़ी है। होम स्टे योजना ने पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पहचान बनाई है और अब इसे सामुदायिक स्वरूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत तीन से छह गांवों के लोग मिलकर समूह, सोसायटी या सहकारी संस्था का गठन कर सामुदायिक होम स्टे संचालित कर सकेंगे। इस मॉडल में गांव के कई परिवार एक साथ जुड़कर पर्यटकों के ठहरने, भोजन, स्थानीय भ्रमण और सांस्कृतिक गतिविधियों की व्यवस्था करेंगे। इससे पर्यटन का लाभ किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र तक पहुंचेगा।
सरकार की ओर से ऐसे समूहों को भी व्यक्तिगत होम स्टे संचालकों की तरह सब्सिडी, प्रशिक्षण, विपणन सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और लोक संस्कृति को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और स्थानीय कला को नया बाजार मिलने की संभावना है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अनेक गांव प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली से समृद्ध हैं, लेकिन पर्यटन सुविधाओं के अभाव में वे मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना पाए हैं। सामुदायिक होम स्टे योजना इन गांवों को पर्यटन से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पलायन रोकने में भी सहायक साबित होगा। स्थानीय युवाओं को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे उन्हें शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। वहीं पर्यटकों को भी उत्तराखंड की वास्तविक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में सामुदायिक होम स्टे मॉडल ग्रामीण पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों को भी पर्यटन के जरिए आर्थिक समृद्धि की नई राह मिलेगी।

