8 june 2026
अल्मोड़ा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनकी शहादत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान परिवार, ग्रामीणों और सेना के जवानों की आंखें नम थीं, लेकिन हर चेहरे पर उनके साहस और समर्पण का गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था।
बीरेश्वर गोस्वामी भारतीय सेना की उस टीम का हिस्सा थे जो राजौरी के दुर्गम जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकियों की तलाश में अभियान चला रही थी। बताया गया कि अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित हो रहा था, जहां ऊंची ढलानें, गहरी खाइयां और खराब मौसम जवानों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए थे। इसी दौरान वह एक कठिन ऑपरेशनल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।
प्रमोशन की खुशियां मातम में बदलीं
बीरेश्वर गोस्वामी के साथियों और परिवार के लिए सबसे भावुक करने वाली बात यह रही कि 8 जून को उनका प्रमोशन होने वाला था। सेना में उन्हें कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया जाना था। इसके लिए नए रैंक के प्रतीक चिह्न और आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी थीं। यूनिट में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। प्रमोशन से ठीक पहले आई शहादत की खबर ने खुशी को गहरे दुख में बदल दिया।
दादी और मां का दर्द देख हर आंख हुई नम
जब तिरंगे में लिपटा बीरेश्वर का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो माहौल गमगीन हो उठा। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ में हर कोई अपने वीर बेटे को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था। दादी और मां की आंखों में अपने लाल को खोने का दर्द साफ झलक रहा था। अंतिम विदाई के समय परिवार की पीड़ा देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। हालांकि परिजनों ने गर्व के साथ कहा कि उनका बेटा देश के लिए जिया और देश के लिए ही शहीद हुआ।
पूरे क्षेत्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। “भारत माता की जय” और “बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें” के नारों के बीच पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। लोगों ने कहा कि अल्मोड़ा ने एक बहादुर सपूत खोया है, लेकिन उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।
देश हमेशा याद रखेगा यह बलिदान
कम उम्र में सेना की वर्दी पहनकर राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने वाले लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उनकी शहादत केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की क्षति है। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। भारतीय सेना ने भी उनके बलिदान को नमन करते हुए कहा है कि उनकी सेवा और समर्पण सदैव याद रखा जाएगा।

