8 june 2026
घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। 14 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 942 रुपये हो गई है। इससे पहले यह सिलेंडर 913 रुपये में उपलब्ध था। पिछले तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बार है जब गैस की कीमतों में वृद्धि की गई है, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
रसोई खर्च में होगा सीधा इजाफा
एलपीजी सिलेंडर हर घर की बुनियादी जरूरतों में शामिल है। ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर रसोई के खर्च पर पड़ता है। मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी अतिरिक्त आर्थिक बोझ लेकर आई है। जिन घरों में हर महीने एक या उससे अधिक सिलेंडर की खपत होती है, वहां घरेलू खर्च का संतुलन बनाना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तीन महीने में दूसरी बढ़ोतरी
गैस उपभोक्ताओं के लिए चिंता की बात यह है कि हाल के महीनों में एलपीजी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। तीन महीने के भीतर दूसरी बार हुई यह बढ़ोतरी संकेत देती है कि ऊर्जा क्षेत्र की लागत और बाजार की परिस्थितियों का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। हालांकि, कीमतों में बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की लागत, परिवहन खर्च और अन्य आर्थिक कारकों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
सब्सिडी का लाभ सीमित लोगों तक
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ अब पहले की तुलना में काफी सीमित हो गया है। ऐसे में सिलेंडर की बढ़ती कीमतें सीधे जेब पर असर डाल रही हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग रसोई गैस की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं।
महंगाई के बीच बढ़ी चुनौती
खाद्य पदार्थों, बिजली और अन्य घरेलू जरूरतों की बढ़ती कीमतों के बीच एलपीजी सिलेंडर का महंगा होना आम परिवारों के लिए एक और चुनौती बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में भी कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही, तो घरेलू बजट पर दबाव और बढ़ सकता है।
उपभोक्ताओं की नजर अगले फैसले पर
फिलहाल 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं की नजर आने वाले महीनों में होने वाले मूल्य निर्धारण पर टिकी हुई है। आम लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में कीमतों को स्थिर रखने के लिए राहत भरे कदम उठाए जाएंगे, ताकि रसोई का बजट और अधिक प्रभावित न हो।

