7 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण (तबादला) मामलों में मानवीय दृष्टिकोण को और मजबूत करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से जारी नए आदेश के तहत अब गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की नौकरी संबंधी परिस्थितियां तथा वृद्ध माता-पिता की देखभाल जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी तबादले के लिए वैध आधार माना जाएगा।
सरकार का मानना है कि स्थानांतरण केवल प्रशासनिक आवश्यकता का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन पर भी पड़ता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
गंभीर बीमारियों के मामलों में मिलेगी राहत
नए आदेश के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी स्वयं या उसके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से पीड़ित है और बेहतर इलाज के लिए किसी विशेष स्थान पर रहना आवश्यक है, तो ऐसे मामलों को तबादले के दौरान प्राथमिकता से देखा जाएगा। संबंधित दस्तावेजों और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर कर्मचारी राहत के पात्र होंगे।
दंपति कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने दंपति मामलों को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया है। यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं और अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही जिले या नजदीकी क्षेत्र में तैनाती देने पर विचार किया जाएगा। इससे पारिवारिक जीवन संतुलित रखने और अनावश्यक कठिनाइयों को कम करने में मदद मिलेगी।
वृद्ध माता-पिता की सेवा को भी माना जाएगा महत्वपूर्ण कारण
नए निर्देशों में उन कर्मचारियों को भी राहत देने की व्यवस्था की गई है जो अपने वृद्ध या असहाय माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे मामलों में स्थानांतरण आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कर्मचारियों को पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में परेशानी न हो।
सभी विभागों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप निर्णय लिए जाएं। साथ ही, कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और व्यावहारिक समस्याओं का भी उचित मूल्यांकन किया जाए।
पारदर्शी और संवेदनशील व्यवस्था की दिशा में कदम
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर लिया गया है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और संवेदनशील बनने की उम्मीद है।
कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि नए दिशा-निर्देश लागू होने के बाद ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो स्वास्थ्य, पारिवारिक या सामाजिक कारणों से तबादलों में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। सरकार का यह कदम कर्मचारी हितों और प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

