5 june 2026
देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 7 जून को देहरादून में आयोजित होने वाली पर्यावरण जागरूकता मैराथन को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। यह आयोजन केवल दौड़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवन, स्वच्छता और हरित विकास के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने का एक व्यापक अभियान बनेगा। हाल के वर्षों में देहरादून में पर्यावरण और स्थानीय जलस्रोतों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इस कार्यक्रम को विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि मैराथन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से ही धरातल पर बदलाव संभव है। दौड़ में विद्यार्थी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, खेल प्रेमी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों के माध्यम से प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
देहरादून लंबे समय से अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और जलधाराओं के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और प्रदूषण जैसी चुनौतियों ने पर्यावरणीय संतुलन पर असर डाला है। ऐसे में जागरूकता आधारित कार्यक्रमों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज के विभिन्न वर्ग पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट होकर छोटे-छोटे प्रयास भी करें तो बड़े सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
मैराथन के दौरान प्रतिभागियों को प्लास्टिक के कम उपयोग, जल संरक्षण, स्वच्छता और पौधारोपण जैसे विषयों पर संदेश दिए जाएंगे। कई स्वयंसेवी संगठन और पर्यावरण प्रेमी भी लोगों को दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतें अपनाने के लिए जागरूक करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहेगा कि स्वस्थ पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती।
आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस प्रकार की पहल युवाओं को पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनती है। दौड़ के माध्यम से एक ऐसा मंच तैयार होता है जहां लोग केवल भागीदारी ही नहीं करते, बल्कि पर्यावरण से जुड़े विषयों पर संवाद भी स्थापित करते हैं। इससे समाज में सकारात्मक सोच विकसित होती है और सामूहिक प्रयासों को नई दिशा मिलती है।
7 जून को होने वाली यह पर्यावरण जागरूकता मैराथन देहरादूनवासियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर देगी। उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होकर यह संदेश देंगे कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते समाज इसके लिए गंभीर और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए।

