3 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में अब तक 28 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, आस्था के इस महापर्व के साथ पर्यावरण पर बढ़ता दबाव भी चिंता का विषय बन गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मई तक चारधाम मार्ग और धाम क्षेत्रों से 288 टन से अधिक कूड़ा-कचरा एकत्र किया जा चुका है। इसमें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने के पैकेट, डिस्पोजेबल सामग्री और अन्य ठोस अपशिष्ट शामिल हैं। हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते कचरे ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता कचरा न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। यात्रा मार्गों पर सफाई अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण चुनौती भी बढ़ती जा रही है।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करें और कचरे को निर्धारित स्थानों पर ही डालें। अधिकारियों का कहना है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि हिमालय की स्वच्छता और संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
चारधाम यात्रा हर साल करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बनती है, लेकिन हिमालय की नाजुक पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। तभी आस्था और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकेगा।

