3 june 2026
जनगणना से जुड़े कार्यों में सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर नियुक्त किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि एलआईसी एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान की श्रेणी में आता है और उसके कर्मचारियों को प्रगणक (Enumerator) या पर्यवेक्षक (Supervisor) के रूप में तैनात करना कानून के अनुरूप है।
अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है, जिसके लिए सरकार को विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार प्राप्त है। अदालत के अनुसार, एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना संबंधी दायित्व सौंपना किसी भी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसलिए केवल इस आधार पर कि कर्मचारी एलआईसी में कार्यरत हैं, उन्हें जनगणना ड्यूटी से छूट नहीं दी जा सकती।
कर्मचारियों की आपत्तियों पर अदालत की टिप्पणी
मामले में यह तर्क रखा गया था कि एलआईसी का मुख्य कार्य बीमा सेवाएं प्रदान करना है, इसलिए उसके कर्मचारियों को जनगणना जैसे प्रशासनिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि जनहित और राष्ट्रीय आवश्यकता से जुड़े कार्यों में विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करना प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है।
जनगणना प्रक्रिया को मिलेगा सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भविष्य में जनगणना जैसे बड़े अभियानों के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने में प्रशासन को सुविधा होगी। एलआईसी के पास देशभर में व्यापक स्तर पर प्रशिक्षित और संगठित कर्मचारी तंत्र मौजूद है, जिसका उपयोग जनगणना कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने में किया जा सकता है।
फैसले का व्यापक प्रभाव
हाईकोर्ट के इस निर्णय को केवल एलआईसी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह फैसला उन संस्थानों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है, जहां कर्मचारी जनगणना अथवा अन्य वैधानिक सरकारी दायित्वों में नियुक्ति को चुनौती देते हैं। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यों के लिए कर्मचारियों की सेवाएं लेना प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है, बशर्ते यह कानून के अनुरूप हो।
इस फैसले के बाद जनगणना से जुड़े आगामी कार्यों में एलआईसी कर्मचारियों की भागीदारी को लेकर बनी कानूनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक समाप्त हो गई है।

