2 june 2026
देहरादून। राजधानी देहरादून के नए जिलाधिकारी आशीष चौहान ने पदभार संभालने के बाद जिले के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि तेजी से बढ़ती आबादी, यातायात दबाव, शहरी विस्तार और नागरिक सुविधाओं की बढ़ती मांग के बीच विकास और व्यवस्थाओं के संतुलन को बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
एक विशेष बातचीत में डीएम चौहान ने कहा कि देहरादून केवल उत्तराखंड की राजधानी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन का प्रमुख केंद्र भी है। ऐसे में यहां रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है, जिससे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। प्रशासन की कोशिश होगी कि विकास कार्यों की गति तेज हो, लेकिन आम जनता को असुविधा न हो।
जनता दरबार का बदला नाम, बताई नई सोच
डीएम आशीष चौहान ने बताया कि पारंपरिक “जनता दरबार” की अवधारणा को अधिक जनोन्मुखी और सहज बनाने के लिए इसका नाम बदला गया है। उनका मानना है कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद केवल औपचारिक दरबार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए। इसी सोच के तहत शिकायतों और सुझावों को सुनने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से हो, इसके लिए संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी। केवल शिकायत दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके समाधान की निगरानी भी प्रशासन की प्राथमिकता होगी।
यातायात और अतिक्रमण पर रहेगा विशेष फोकस
राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण को लेकर डीएम ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके समाधान के लिए पुलिस, नगर निगम और अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाकर ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।
अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित रखना जरूरी है। हालांकि कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा और प्रभावित लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
नए जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में लगातार काम किया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को कम करना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
जनभागीदारी से मिलेगा बेहतर परिणाम
डीएम चौहान का मानना है कि प्रशासनिक योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनमें जनता की सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे समस्याओं के साथ-साथ समाधान संबंधी सुझाव भी प्रशासन तक पहुंचाएं। इससे विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
‘सुनवाई ही नहीं, समाधान भी दिखना चाहिए’
बातचीत के अंत में डीएम आशीष चौहान ने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि प्रशासन आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और संवेदनशील बने। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यवस्था की सफलता का पैमाना केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि उनका समय पर और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है। देहरादून के विकास, बेहतर यातायात व्यवस्था और सुशासन को लेकर प्रशासन आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।

