देहरादून ; 28.08.2026,
हरिद्वार। श्रावणी पर्व और रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को हरिद्वार में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। गंगा के विभिन्न घाटों पर तीर्थ पुरोहितों ने विधि-विधान से पूजा-अनुष्ठान किया। हर की पैड़ी समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं और पुरोहितों ने गंगा स्नान कर वैदिक परंपरा के अनुसार श्रावणी उपाकर्म की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भी श्रावणी पर्व श्रद्धा और आध्यात्मिक भाव के साथ मनाया गया। सुबह से ही परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ प्रज्ञागीतों की स्वर लहरियां पूरे परिसर में सुनाई देती रहीं। बड़ी संख्या में गायत्री परिजन, कार्यकर्ता और देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु आयोजन में शामिल हुए।
राष्ट्र और धर्म रक्षा का लिया संकल्प
श्रावणी पर्व के अवसर पर शांतिकुंज में सैकड़ों गायत्री परिजनों ने हेमाद्रि संकल्प लिया। इस दौरान राष्ट्र और धर्म की रक्षा के साथ अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प भी लिया गया। श्रद्धालुओं ने जीवन में सद्विचार, संयम और सेवा भाव को अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
श्रावणी उपाकर्म के अंतर्गत आंतरिक शुद्धि से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न कराए गए। इसके साथ बाह्य शुद्धि की परंपरागत प्रक्रिया भी पूरी हुई। आयोजन में मौजूद लोगों ने स्वयं के जीवन को सकारात्मक विचारों और सद्कर्मों से जोड़ने का संकल्प लिया।
अखंड दीप के दर्शन को पहुंचे परिजन
श्रावणी पर्व पर शांतिकुंज में अखंड दीप के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भाई-बहन, छात्र-छात्राओं और बच्चों ने श्रद्धा के साथ दर्शन किए। शांतिकुंज, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान और देव संस्कृति विश्वविद्यालय से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन में सहभागिता की।
देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से आए गायत्री परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा की चरण पादुकाओं पर श्रद्धा अर्पित की। आध्यात्मिक माहौल और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कई श्रद्धालु भावुक नजर आए।
हरकी पैड़ी पर तीर्थ पुरोहितों ने किया श्रावणी उपाकर्म
हरकी पैड़ी पर भी श्रावणी पर्व की विशेष छटा देखने को मिली। तीर्थ पुरोहितों ने गंगा स्नान के बाद विधि-विधान से हेमाद्रि संकल्प लिया। इस अवसर पर यज्ञोपवीत और रक्षा सूत्रों का अभिसिंचन किया गया। पुरोहित समाज ने वैदिक परंपरा के अनुरूप अनुष्ठान पूरा कर श्रावणी पर्व की धार्मिक महत्ता को जीवंत किया।
श्रावणी पर्व के दौरान हरिद्वार के गंगा घाटों पर एक ओर जहां धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा निभाई गई, वहीं दूसरी ओर लोगों ने अपने जीवन में संस्कार, सेवा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को मजबूत करने का संदेश भी लिया।

