देहरादून ; 06.09.2026।
देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह ग्राउंड में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत कर गोर्खाली समाज की माताओं और बहनों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले समय में हरितालिका तीज उत्सव को सरकारी स्तर पर और अधिक व्यापक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली के साथ गोर्खाली समाज के सभी परिवारों के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह माता पार्वती की कठोर साधना, दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट विश्वास का संदेश भी देता है। यह पर्व समाज को यह प्रेरणा देता है कि मजबूत संकल्प और विश्वास के साथ कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में माताओं और बहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। परिवार और समाज के स्तर पर महिलाएं लोकभाषा, रीति-रिवाज, पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। इसी वजह से हमारी लोक संस्कृति आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
गोर्खा समाज के योगदान को किया नमन
मुख्यमंत्री धामी ने गोर्खाली समाज की वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में गोरखा जवानों का योगदान गौरवपूर्ण रहा है। सीमा पर कठिन परिस्थितियों में भी गोरखा सैनिकों ने साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। राष्ट्र की रक्षा के लिए बलिदान देने की परंपरा ने गोर्खाली समाज को देशभर में सम्मान दिलाया है।
उन्होंने कहा कि समाज के वीरों का त्याग और शौर्य केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कप्तान दल बहादुर थापा की स्मृति में ‘आजाद हिंद फौज शहीद द्वार’ का शिलान्यास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारक गोरखा वीरों के साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की याद को लंबे समय तक जीवित रखने का माध्यम बनेगा। साथ ही युवा पीढ़ी को देश के लिए समर्पित रहे वीरों के जीवन और योगदान को जानने का अवसर मिलेगा।
भारत-नेपाल संबंधों को बताया पारिवारिक जुड़ाव
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के संबंधों को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध महज भौगोलिक पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर गहरा जुड़ाव रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्होंने भारत और नेपाल के बीच मौजूद इस आत्मीयता और साझा संस्कृति को करीब से महसूस किया है। दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बने रिश्ते इस संबंध को और मजबूत करते हैं।
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा है और आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने नेपाल के जल्द सामान्य स्थिति में लौटने की कामना भी की।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आचार्य बालकृष्ण, मुख्यमंत्री की पत्नी गीता पुष्कर धामी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव कमेटी की अध्यक्ष प्रभा शाह, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, नेहा जोशी, सिद्धार्थ अग्रवाल, अनुकृति गुसाईं समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

