देहरादून ; 06.09.2026।
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की विविध सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने में पूर्वोत्तर भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर की संस्कृति, परंपराएं और वहां के युवाओं की प्रतिभा भारत की ताकत हैं। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति और जीवनशैली से जोड़ने वाले आयोजन राष्ट्रीय एकता की भावना को और गहरा करते हैं।
मुख्यमंत्री नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में My Home India की ओर से आयोजित “NeST Fest-2026” में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों से पहुंचे विद्यार्थियों और युवाओं का उत्तराखंड की ओर से स्वागत किया तथा आयोजन के लिए संस्था की टीम को शुभकामनाएं दीं।
शिक्षकों को दी शुभकामनाएं
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने देशभर के शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके योगदान को नमन किया। उन्होंने महान शिक्षाविद् और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने के साथ आने वाली पीढ़ियों के चरित्र और भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
युवा देश की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज के युवा केवल शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि भारत की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनमें नई सोच, मेहनत और बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का आत्मविश्वास है। ऐसे मंच युवाओं को संवाद, अनुभव साझा करने और देश के विभिन्न हिस्सों को करीब से समझने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि NeST Fest को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह पूर्वोत्तर की विविध परंपराओं को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने और लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने का माध्यम है।
उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के बीच कई समानताएं
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के बीच भौगोलिक एवं सामाजिक समानताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों में पहाड़ी भूगोल, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और प्रकृति से गहरा जुड़ाव देखने को मिलता है। इन समानताओं के कारण दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच स्वाभाविक आत्मीयता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच इस तरह का संवाद भारत की एकता को केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी मजबूत करता है।
पूर्वोत्तर विकास और सुरक्षा, दोनों में अहम
मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए कहा कि देश की विविधता को समझने के लिए इस क्षेत्र को समझना जरूरी है। सामरिक दृष्टि से भी पूर्वोत्तर का महत्व बहुत अधिक है और सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यह राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने पूर्वोत्तर से निकलकर देश और दुनिया में पहचान बनाने वाली कई प्रतिभाओं का उल्लेख किया। मैरी कॉम, मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहेन, बाइचुंग भूटिया और भारत रत्न भूपेन हजारिका जैसी हस्तियों ने अपनी उपलब्धियों से पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
कनेक्टिविटी बढ़ने से बदली विकास की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर को देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जिस क्षेत्र को देश के मुख्य विकास प्रवाह से दूर माना जाता था, वहां अब बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है।
सड़क और पुल निर्माण से लेकर सुरंग, जलमार्ग, गैस नेटवर्क, मोबाइल सेवाओं और ऑप्टिकल फाइबर जैसी सुविधाओं के विस्तार ने पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को भी बेहतर संपर्क प्रदान किया है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर अब केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्रगति में भी उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा और खेल में युवाओं के लिए नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और खेल के क्षेत्र में भी पूर्वोत्तर में लगातार नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। नए शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और कौशल विकास केंद्रों के विस्तार से युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शिक्षा एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं के मामले में पूर्वोत्तर पहले से ही देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दे चुका है। बेहतर खेल सुविधाओं और प्रतियोगिताओं के विस्तार से इस क्षेत्र की नई प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा।
राष्ट्रीय खेलों की मशाल से जुड़ा उत्तराखंड और पूर्वोत्तर
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में वर्ष 2025 में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में देशभर से 10 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। उत्तराखंड से राष्ट्रीय खेलों की मशाल पूर्वोत्तर तक पहुंचाई गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूर्वोत्तर में होने वाले राष्ट्रीय खेल भी देशभर के खिलाड़ियों को नई ऊर्जा और बेहतर अवसर प्रदान करेंगे।
‘देवभूमि आपका अपना घर’—पूर्वोत्तर के छात्रों से धामी
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में शिक्षा हासिल कर रहे पूर्वोत्तर राज्यों के विद्यार्थियों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड उनके लिए केवल शिक्षा का स्थान नहीं, बल्कि अपना घर है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में रह रहे पूर्वोत्तर के युवाओं की सुरक्षा, सम्मान और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से मेहनत के साथ पढ़ाई और खेलों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा ही विकसित भारत के लक्ष्य को गति दे सकती है। यदि युवा अपनी क्षमता का सही दिशा में इस्तेमाल करें, तो भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।

