देहरादून ; 26.08.2026।
देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक आख्यानों को सिनेमा के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासकीय आवास पर उत्तराखंड के लोकजीवन में न्याय देवता के रूप में पूजनीय गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गौरिया’ के टीजर और पोस्टर का लोकार्पण किया। फिल्म के सामने आने के साथ ही उत्तराखंड की लोक आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है।
हिमाद्रि प्रोडक्शंस के बैनर तले तैयार हो रही इस फिल्म का निर्देशन नितिन तिवारी कर रहे हैं, जबकि निर्माण की जिम्मेदारी मनोज चंदोला संभाल रहे हैं। फिल्म को लेकर निर्माताओं की ओर से अक्टूबर के पहले सप्ताह में रिलीज किए जाने की संभावना जताई गई है।
लोकदेवता गोलज्यू के बाल जीवन पर केंद्रित कहानी
‘बाला गौरिया’ की सबसे खास बात इसका विषय है। फिल्म उत्तराखंड में व्यापक आस्था के केंद्र माने जाने वाले गोलज्यू के बाल जीवन और उनसे जुड़े लोक आख्यानों को आधार बनाती है। लोक परंपराओं में गोलज्यू को न्याय के देवता के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसे में उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को सिनेमाई रूप देने का प्रयास प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी के सामने रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
मुख्यमंत्री धामी ने टीजर और पोस्टर के लोकार्पण के अवसर पर फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोकगाथाएं और लोक देवताओं से जुड़ी मान्यताएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश में फिल्म निर्माण के साथ-साथ फिल्म पर्यटन को भी प्रोत्साहित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती, विविध भौगोलिक परिस्थितियां और समृद्ध लोक संस्कृति इसे फिल्म शूटिंग के लिए आकर्षक स्थान बनाती हैं।
सरकार का प्रयास है कि देश और विदेश से आने वाले फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में शूटिंग के दौरान बेहतर सुविधाएं, आवश्यक सहयोग और सरल अनुमति व्यवस्था उपलब्ध हो। पर्यटन नीति में भी फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, शूटिंग के लिए प्रोत्साहन देने और अनुमति प्रक्रिया को तेज एवं सुविधाजनक बनाने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाने का लाभ केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। फिल्म निर्माण से स्थानीय युवाओं को अभिनय, तकनीकी कार्य, कैमरा, एडिटिंग, प्रोडक्शन, मेकअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
उनका कहना था कि फिल्म उद्योग के विस्तार से प्रदेश की आर्थिकी को गति मिलने के साथ ही उत्तराखंड की बोली-भाषा, कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को भी व्यापक पहचान मिल सकती है।
लोक संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न मानते हुए इन्हें प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और जीवन मूल्यों का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं का संरक्षण और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की कि उत्तराखंड की अन्य लोकगाथाओं, लोक देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी फिल्में बनाई जाएं। सरकार की ओर से स्थानीय प्रतिभाओं और उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग देने की बात भी कही गई।
‘बाला गौरिया’ का टीजर और पोस्टर जारी होना इस लिहाज से भी अहम माना जा रहा है कि उत्तराखंड की स्थानीय लोककथाओं को मनोरंजन के साथ सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। फिल्म के जरिए प्रदेश की लोक थाती को नया मंच मिलने के साथ उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रचार मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर फिल्म निर्माता मनोज चंदोला समेत फिल्म से जुड़े कलाकार और अन्य टीम सदस्य मौजूद रहे।

