देहरादून ; 31.10.2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस को उसकी गौरवशाली परंपरा, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के अनुरूप नई पहचान देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तराखण्ड पुलिस के नए ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण किया। इस बदलाव के साथ पुलिस बल की पहचान को नया स्वरूप दिया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ विषय पर आधारित सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का भी शुभारंभ किया और उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के गौरव चिह्नों में किया गया बदलाव केवल बाहरी स्वरूप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन की जिम्मेदारियों, अनुशासन और सेवा भावना को नए सिरे से मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से अपेक्षा की कि वे नई पहचान के अनुरूप अपने व्यवहार और कार्यशैली में भी उच्च मानक स्थापित करें। उनके अनुसार पुलिस की वास्तविक प्रतिष्ठा तभी कायम होती है, जब आम नागरिक को उसके व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्रवाई में निष्पक्षता और कामकाज में तेजी दिखाई दे।
नए प्रतीक में राष्ट्रीय गौरव और उत्तराखण्ड की पहचान का समावेश
उत्तराखण्ड पुलिस के नए प्रतीक चिह्न को तैयार करते समय राष्ट्रीय सम्मान और राज्य की प्राकृतिक पहचान को विशेष स्थान दिया गया है। इसमें अशोक स्तंभ, सत्यमेव जयते, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। ये प्रतीक सत्य, न्याय, उत्कृष्टता, राष्ट्रीय गौरव और उत्तराखण्ड की विशिष्ट भौगोलिक पहचान को प्रदर्शित करते हैं।
पुलिस के पुराने तीन रंगों वाले क्षैतिज ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसके बीच में नया पुलिस प्रतीक चिह्न रखा गया है, जबकि किनारों पर लाल और सुनहरे रंग की पट्टियां दी गई हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्दी पर लगने वाले फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी इसी नई पहचान के अनुरूप तैयार किया गया है।
सेरेमोनियल वर्दी में भी बदलाव किया गया है। पारंपरिक खाकी परिधान को बरकरार रखते हुए इसमें बहुरंगी सैश, विशेष अलंकरण और परेड के अनुरूप आकर्षक साज-सज्जा जोड़ी गई है। इससे पुलिस की औपचारिक परेड और राजकीय समारोहों में एकरूपता के साथ नई पहचान दिखाई देगी।
‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ बनेगा पुलिसकर्मियों का मार्गदर्शक संदेश
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के नए ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कर्म, सत्य और साहस के मूल भाव समाहित हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिसकर्मी को इन सिद्धांतों को केवल अपने प्रतीक चिह्न तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि दैनिक कार्यों और नागरिकों के साथ व्यवहार में भी उतारना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड पुलिस को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि पुलिस व्यवस्था बदलती परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
भ्रष्टाचार की शिकायतों पर 1064 हेल्पलाइन से होगी निगरानी
कार्यक्रम के दौरान सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ तभी आम नागरिक तक पहुंच सकता है, जब सरकारी योजनाओं और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो तथा लोगों को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख करते हुए सतर्कता विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई करने के साथ उन व्यवस्थागत कमियों को भी दूर करना जरूरी है, जिनकी वजह से अनियमितताओं को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी मामले में चुप रहने के बजाय उसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1064 पर दर्ज कराएं। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की तर्ज पर 1064 की भी नियमित समीक्षा की जाए। शिकायत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी जाए और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को यह भी निर्देश दिया कि सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें, उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनें और निर्धारित समयसीमा में कार्यों का निस्तारण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां नागरिकों को सम्मान मिले और शासन-प्रशासन के प्रति उनका भरोसा बना रहे।
6 नवंबर को मिलेगा उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि का जिक्र करते हुए बताया कि आगामी 6 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से सम्मानित करेंगे। इस अवसर पर पुलिस के जवान नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में हिस्सा लेंगे। यह सम्मान पुलिस बल के लिए विशेष महत्व रखता है और इसकी जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नई पहचान के साथ उत्तराखण्ड पुलिस जनसेवा, अनुशासन, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के क्षेत्र में अपने कार्यों को आगे बढ़ाएगी।
पुलिस की पुरानी पहचान में 18 साल बाद बदलाव
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड पुलिस के वर्तमान ध्वज का अनावरण 4 अप्रैल 2008 को किया गया था। बदलते समय, सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियों और पुलिस बल की बढ़ती जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए नए गौरव चिह्न तैयार किए गए हैं। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को इन नए प्रतीकों और स्वरूप को मंजूरी प्रदान की थी।
कार्यक्रम में उत्तराखण्ड पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति पाने वाली शाहजहां जावेद खान और जगदीश चंद्र को प्रतीक चिह्न से अलंकृत कर बधाई दी गई।
नए ध्वज और प्रतीक चिह्नों के अनावरण के साथ उत्तराखण्ड पुलिस ने अपनी संस्थागत पहचान में बदलाव की शुरुआत की है। अब इस नई पहचान के साथ नागरिकों को बेहतर सुरक्षा, पारदर्शी कार्यप्रणाली और समयबद्ध पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना भी इस पहल की अहम कसौटी होगी।

