देहरादून ; 31.10.2026,
चमोली। हिमालय की वादियों में बसी विश्वप्रसिद्ध फूलों की घाटी का पर्यटन सत्र समाप्त हो गया है। शनिवार, 31 अक्टूबर को वन विभाग ने घाटी को इस सीजन के लिए पर्यटकों की आवाजाही के मद्देनजर बंद कर दिया। इस बार घाटी में सैलानियों की ऐसी रौनक देखने को मिली, जिसने पिछले कई वर्षों के सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। जून से अक्टूबर तक चले पर्यटन सत्र में कुल 35,261 पर्यटक यहां पहुंचे और प्रकृति के अनुपम सौंदर्य को करीब से महसूस किया।
फूलों की घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। इसके बाद से ही देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमियों ने यहां का रुख किया। रंग-बिरंगे फूलों की चादर, ऊंचे हिमालयी पर्वत, प्राकृतिक जलधाराएं और दुर्लभ वनस्पतियों ने पर्यटकों को आकर्षित किया। यही वजह रही कि इस बार घाटी में पर्यटकों की संख्या अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई।
वन क्षेत्राधिकारी आशीष जिरवान के अनुसार, पूरे सीजन में कुल 35,261 लोगों ने फूलों की घाटी का भ्रमण किया। इनमें 34,996 भारतीय और 265 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। भारतीय पर्यटकों में 21,306 पुरुष और 8,604 महिलाएं थीं। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 4,431 विद्यार्थी एवं शोधकर्ता तथा 12 वर्ष से अधिक आयु के 124 बच्चे भी घाटी पहुंचने वालों में शामिल रहे। वहीं 531 वरिष्ठ आयु के पर्यटकों ने भी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लिया।
विदेशी पर्यटकों की बात करें तो इस सीजन 127 पुरुष और 138 महिलाएं फूलों की घाटी पहुंचीं। विदेशी सैलानियों की मौजूदगी से यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्तराखंड की यह प्राकृतिक धरोहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
पर्यटन से वन विभाग को मिला 67 लाख रुपये से अधिक राजस्व
पर्यटकों की इस रिकॉर्ड आमद का असर वन विभाग की आय पर भी दिखाई दिया। विभाग को पूरे पर्यटन सत्र के दौरान प्रवेश एवं अन्य निर्धारित शुल्क के माध्यम से कुल 67 लाख 7 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने फूलों की घाटी की पर्यटन क्षमता और इसके आर्थिक महत्व को भी सामने रखा है।
खराब मौसम के चलते एक दिन बंद रही थी घाटी
इस पर्यटन सत्र के दौरान मौसम ने भी कुछ समय के लिए चुनौती पेश की। 27 सितंबर को क्षेत्र में अत्यधिक बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए घाटी में आवाजाही एक दिन के लिए रोक दी गई थी। मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद पर्यटकों के लिए आवागमन फिर से शुरू कर दिया गया। हालांकि इस अस्थायी रोक का कुल पर्यटक संख्या पर कोई खास असर नहीं पड़ा और सीजन समाप्त होने तक रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई।
जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता बनी आकर्षण का केंद्र
चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी अपनी अनूठी भौगोलिक परिस्थितियों और समृद्ध जैव विविधता के लिए दुनिया भर में पहचान रखती है। यहां अलग-अलग मौसमों में सैकड़ों प्रकार के रंगीन फूल खिलते हैं। दुर्लभ वनस्पतियां, मनमोहक पर्वतीय दृश्य और विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र इस क्षेत्र को प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण में रुचि रखने वाले लोगों के लिए खास बनाते हैं।
31 अक्टूबर को पर्यटन गतिविधियां बंद होने के साथ ही अब घाटी में शीतकालीन मौसम की तैयारी शुरू हो जाएगी। बर्फबारी और कठिन मौसमी परिस्थितियों के कारण यहां पर्यटकों की आवाजाही हर वर्ष निर्धारित अवधि तक ही सीमित रहती है। इस बार 35,261 पर्यटकों की मौजूदगी ने फूलों की घाटी की लोकप्रियता को नई पहचान दी है। रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे सैलानियों ने एक बार फिर साबित किया कि उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत देश ही नहीं, बल्कि विदेशों के पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखती है।

