देहरादून ; 31.10.2026,
देहरादून। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर सेवाओं को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने नई संचालन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत चारधाम सेक्टर में सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर से संचालित होने वाली सभी चार्टर्ड उड़ानों में अब दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य होगी। साथ ही प्रत्येक उड़ान के टेकऑफ और लैंडिंग से पहले उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के हेली ऑपरेशन अधिकारी (एचओओ) से अनुमति लेना जरूरी होगा। यह नई व्यवस्था 2 नवंबर से प्रभावी होगी।
बदरीनाथ धाम क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद हवाई सेवाओं की सुरक्षा और निगरानी को लेकर यह बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उड़ानों के संचालन पर बेहतर नियंत्रण रखना, मौसम एवं मार्ग से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी समय पर प्राप्त करना और प्रत्येक उड़ान की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना है।
हर उड़ान से पहले गंतव्य की मंजूरी जरूरी
नए नियमों के अनुसार चारधाम क्षेत्र में उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों को अब अपनी यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित नियंत्रण केंद्र से गंतव्य की अनुमति प्राप्त करनी होगी। इसके लिए सहस्रधारा या सोनप्रयाग हेलीपैड पर तैनात हेली ऑपरेशन अधिकारी से संपर्क करना अनिवार्य रहेगा। बिना अनुमति किसी भी उड़ान को आगे बढ़ाने की स्वीकृति नहीं मिलेगी।
इसके अलावा टेकऑफ और लैंडिंग की प्रत्येक प्रक्रिया को भी अधिकारी की मंजूरी से जोड़ दिया गया है। इससे हेलीपैड स्तर पर उड़ानों का संचालन अधिक अनुशासित तरीके से किया जा सकेगा और अनावश्यक जोखिम की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।
लैंडिंग के बाद देनी होगी लिखित जानकारी
नई व्यवस्था में उड़ान पूरी होने के बाद भी पायलटों की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। हेलीकॉप्टर के प्रत्येक लैंडिंग के बाद सह-पायलट को निर्धारित प्रारूप में उड़ान से संबंधित रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट को सहस्रधारा अथवा सोनप्रयाग स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।
रिपोर्ट में उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर अगली उड़ान के लिए गंतव्य की मंजूरी दी जाएगी। यानी किसी हेलीकॉप्टर के एक स्थान पर पहुंचने के बाद वहां की स्थिति और उड़ान से जुड़ी जानकारी अगली यात्रा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रक्रिया से कंट्रोल रूम को लगातार अपडेट मिलता रहेगा और उड़ानों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सकेगा।
दूसरी कंपनियों के पायलट भी बन सकेंगे सह-पायलट
दो पायलटों की अनिवार्यता के चलते हेलीकॉप्टर कंपनियों के सामने अतिरिक्त पायलटों की उपलब्धता की चुनौती भी आ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए डीजीसीए ने कंपनियों के बीच पायलटों की उपलब्धता से जुड़े अनुरोधों को आसान बनाने का प्रावधान रखा है। यदि किसी कंपनी को दूसरी कंपनी के पायलट की सेवाएं सह-पायलट के रूप में लेनी हैं, तो इसके लिए फोन के माध्यम से भी तत्काल अनुरोध और कार्रवाई की जा सकेगी।
इससे कंपनियों को जरूरत के अनुसार योग्य सह-पायलट उपलब्ध कराने में सुविधा मिलेगी और उड़ानों के संचालन में अनावश्यक बाधा आने की संभावना कम होगी।
60 वर्ष से अधिक उम्र के पायलट को भी मिली छूट
डीजीसीए ने सह-पायलट की नियुक्ति को लेकर आयु संबंधी नियमों में भी कुछ राहत दी है। अब 60 वर्ष से अधिक आयु का पायलट भी सह-पायलट के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेगा। हालांकि, इसके लिए उसका पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ाने के संचालन संबंधी मानकों के अनुरूप योग्य होना आवश्यक होगा।
वहीं, विमान के प्रभारी पायलट यानी पायलट इन कमांड (पीआईसी) के लिए पहले से निर्धारित अनुभव, योग्यता और हालिया उड़ान अभ्यास की शर्तों में कोई ढील नहीं दी गई है। इसका मतलब है कि मुख्य पायलट की जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को निर्धारित मानकों का पालन करना ही होगा।
2 नवंबर से लागू होंगे नए प्रावधान
यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि डीजीसीए की ओर से तय की गई नई व्यवस्था 2 नवंबर से लागू की जाएगी। इसके बाद चारधाम सेक्टर में संचालित संबंधित चार्टर्ड हेलीकॉप्टर उड़ानों को नए सुरक्षा और संचालन संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।
नई व्यवस्था से चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की निगरानी, पायलटों के बीच समन्वय और उड़ानों की अनुमति प्रक्रिया में बदलाव आएगा। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हर उड़ान से पहले और बाद में जानकारी का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब उड़ान संचालन के प्रत्येक चरण को निर्धारित अनुमति और रिपोर्टिंग प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है।

