देहरादून ; 30.10.2026,
देहरादून। लोक भवन में शुक्रवार को ‘युवा संगम’ कार्यक्रम के तहत पश्चिम बंगाल से उत्तराखण्ड पहुंचे विद्यार्थियों ने राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर संवाद किया। इस दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को करीब से समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा संगम का उद्देश्य केवल अलग-अलग राज्यों की यात्रा करना नहीं है, बल्कि देश की विविध परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विशेषताओं को जानकर आपसी संबंधों को मजबूत बनाना है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता यहां की अनेक भाषाएं, रीति-रिवाज, खान-पान और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। इन सबके बावजूद देश एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। जब एक राज्य के विद्यार्थी दूसरे राज्य में जाकर वहां के समाज और संस्कृति से परिचित होते हैं, तो उनके विचारों का दायरा व्यापक होता है और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के प्रति सम्मान तथा अपनत्व की भावना विकसित होती है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को देश की वास्तविक विविधता से परिचित कराने के साथ राष्ट्रीय एकता को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल देश के विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपनी यात्रा के दौरान केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय लोगों से बातचीत करें, उनकी भाषा, परंपराओं, खान-पान और सामाजिक जीवन को भी समझें। इस तरह प्राप्त अनुभव उनके व्यक्तित्व और सोच को नई दिशा देने में सहायक होंगे।
विद्यार्थियों को जीवन के मूल्यों का संदेश देते हुए राज्यपाल ने अच्छे संस्कार, सकारात्मक विचार और मजबूत चरित्र को सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के जीवन में राष्ट्रहित की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। प्रत्येक युवा के मन में देश प्रथम का संकल्प होना आवश्यक है। जीवन में कई बार व्यक्ति परिस्थितियों के कारण अपने लक्ष्य से भटक सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि वह अपनी गलतियों से सीख लेकर दोबारा सही मार्ग पर आगे बढ़े। अपने अनुभवों को सीख में बदलना ही व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया है।
राज्यपाल ने युवाओं की प्रतिभा और क्षमताओं को देश की प्रगति से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और तकनीकी ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग समाज की जरूरतों को पूरा करने में किया जाए। युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से किसानों की समस्याओं, ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण और समाज के जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए काम करना चाहिए। उनकी रचनात्मक सोच और नवाचार देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। केवल शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं में अनुशासन, जिम्मेदारी, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का होना भी उतना ही आवश्यक है। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ज्ञानवान होने के साथ चरित्रवान नागरिकों की भूमिका भी अहम रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने ‘युवा संगम’ के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के समन्वयकों, शिक्षकों, अधिकारियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को कक्षा और पुस्तकों से बाहर निकलकर देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश को समझने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि भारत की विविधता को समझना, उसका सम्मान करना और राष्ट्र के विकास में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना प्रत्येक युवा की जिम्मेदारी है। युवा संगम जैसी पहल इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए देश के विभिन्न हिस्सों के युवाओं को एक-दूसरे के करीब लाने का काम कर रही है।

