देहरादून ; 26.08.2026।
देहरादून। टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा ने बुधवार को द्रोणनगरी को पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग दिया। सुबह शिवाजी धर्मशाला से शुरू हुई यात्रा जैसे-जैसे शहर के विभिन्न मार्गों से आगे बढ़ी, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। चारों ओर भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे और भजनों की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, देशभक्ति और मनोरंजन के अनूठे संगम ने शोभायात्रा को खास बना दिया।
श्री टपकेश्वर महादेव सेवा दल की ओर से आयोजित इस शोभायात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। उन्होंने भगवान टपकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने के साथ लोगों के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि परंपराओं से जुड़ने वाले कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत को समझने का अवसर भी देते हैं।
डमरू की थाप पर झूमे श्रद्धालु
शोभायात्रा में उज्जैन से पहुंचे डमरू दल की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डमरू की गूंज और शिवभक्ति से जुड़े जयकारों ने वातावरण में अलग ही ऊर्जा भर दी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु डमरू की थाप पर झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए। कई स्थानों पर लोगों ने यात्रा का स्वागत करते हुए पुष्पवर्षा की और भगवान शिव की झांकियों के दर्शन किए।
कलश धारण किए महिलाओं की टोली ने भी शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिलाओं ने धार्मिक अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा में हिस्सा लिया। उनके साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने भी भजन-कीर्तन और जयकारों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
शिव बरात ने खींचा लोगों का ध्यान
शोभायात्रा में शिव बरात का दृश्य भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव की बरात में विभिन्न रूपों में सजे कलाकार शामिल हुए। भोलेनाथ की सेना के रूप में शामिल कलाकारों ने अपने करतबों और प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इन झांकियों को उत्सुकता के साथ देखा और कई लोगों ने मोबाइल कैमरों में इन यादगार पलों को कैद किया।
फूलों से सजाई गई कई ट्रालियों पर तिरंगे भी लगाए गए थे। धार्मिक भजनों के बीच देशभक्ति गीतों की गूंज ने आयोजन में राष्ट्रप्रेम का संदेश भी जोड़ा। तिरंगे से सजी झांकियों ने शोभायात्रा की भव्यता के साथ देश के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को भी सामने रखा।
हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने बढ़ाई भव्यता
शोभायात्रा के दौरान आतिशबाजी और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया। आसमान से बरसते फूलों के बीच आगे बढ़ती झांकियों का दृश्य बेहद आकर्षक नजर आया। पुष्पवर्षा होते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा माहौल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के साथ व्यापारियों ने भी स्वागत की तैयारियां की थीं। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए और श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, जलपान तथा पेयजल की व्यवस्था की गई। व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने झांकियों पर पुष्पवर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ यात्रा के स्वागत के लिए पहले से ही मौजूद रही।
शोभायात्रा में शहर के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों की भागीदारी ने इसे व्यापक जन-उत्सव का रूप दे दिया। युवा भक्ति गीतों पर उत्साह से झूमते नजर आए तो महिलाएं और बुजुर्ग भी धार्मिक उत्साह के साथ यात्रा का हिस्सा बने। बच्चों में भी सजी-धजी झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
आस्था के साथ एकता और संस्कृति का संदेश
टपकेश्वर महादेव की शोभायात्रा में इस बार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अलग-अलग वर्गों और आयु समूहों के लोगों ने एक साथ शामिल होकर आयोजन को भव्य बनाया। पूरे यात्रा मार्ग में बने उत्सव के माहौल ने द्रोणनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर किया।
दिनभर शहर में शिवभक्ति का उत्साह बना रहा। जयकारों, डमरू की थाप, भजनों, झांकियों और पुष्पवर्षा के बीच निकली शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं के लिए इसे यादगार बना दिया। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक परंपराएं जब समाज की सहभागिता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ती हैं, तो वे केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहकर सामूहिक उत्सव का रूप ले लेती हैं।

