देहरादून ; 24.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा की कमान संभालने के बाद नए प्रदेश प्रभारी राम माधव पहली बार प्रदेश संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ औपचारिक बैठक करने जा रहे हैं। 25 सितंबर को देहरादून में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है। इसमें राम माधव के साथ नवनियुक्त सह प्रभारी अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहेंगी। नई टीम की प्रदेश में सक्रियता ऐसे समय शुरू हो रही है, जब राज्यसभा चुनाव के साथ 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी संगठन के एजेंडे में हैं।
राज्यसभा सीट के लिए तीन नामों पर होगी चर्चा
कोर कमेटी की बैठक में सबसे अहम मुद्दों में उत्तराखंड से खाली होने वाली राज्यसभा सीट शामिल है। मौजूदा राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक इस सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार पार्टी की प्रदेश इकाई संभावित दावेदारों में से तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। इस सूची को केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा जाएगा, जहां अंतिम प्रत्याशी के नाम पर निर्णय होगा। ऐसे में 25 सितंबर की बैठक राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी की प्रक्रिया का अहम चरण मानी जा रही है।
नई प्रभारी टीम के सामने संगठन की कई चुनौतियां
राम माधव को उत्तराखंड का नया प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के साथ ही अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्तियां भाजपा के हालिया राष्ट्रीय संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा हैं। राम माधव को उत्तराखंड के साथ तमिलनाडु की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई टीम की पहली बैठक केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहने वाली है। बैठक में प्रदेश संगठन की गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की जानी है। 2027 के चुनाव को देखते हुए पार्टी पहले ही सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां आगे बढ़ा चुकी है।
राम माधव के अनुभव पर संगठन की नजर
राम माधव भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह 2014 से 2020 तक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे। इस अवधि में उन्हें पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर सहित कई महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्रों में पार्टी के काम से जोड़ा गया था। अगस्त 2026 में वह भाजपा की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष के रूप में भी लौटे।
उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब भाजपा उत्तराखंड में संगठन को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय कर रही है। लिहाजा देहरादून में होने वाली पहली बैठक में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और संगठन की आगामी दिशा पर भी नजर रहेगी।
अरविंद मेनन का फोकस संगठन पर
सह प्रभारी अरविंद मेनन भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने आरएसएस प्रचारक के रूप में काम करने के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठनात्मक दायित्व मिले और पश्चिम बंगाल में पार्टी के विस्तार से जुड़े काम में उनकी भूमिका रही।
उत्तराखंड में उनकी भूमिका खास तौर पर संगठनात्मक गतिविधियों और प्रदेश इकाई के साथ समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बांसुरी स्वराज के लिए भी नई जिम्मेदारी
दिल्ली से लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड का सह प्रभारी बनाया गया है। वह वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी हैं। 2024 में उन्होंने नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार संसद में प्रवेश किया। अब उत्तराखंड की संगठनात्मक जिम्मेदारी उनके राजनीतिक दायरे को दिल्ली से बाहर भी विस्तार देगी।
उनकी नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड में एक अलग चर्चा इसलिए भी है क्योंकि उनकी मां सुषमा स्वराज का इस राज्य से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। अब बांसुरी स्वराज को प्रदेश संगठन में नई भूमिका मिलने से पार्टी की गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
25 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
नई प्रभारी टीम के प्रदेश पहुंचने और कोर कमेटी की बैठक के साथ उत्तराखंड भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे तत्काल विषय राज्यसभा सीट के लिए तीन नामों का पैनल तैयार करना है। इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन की आगामी कार्ययोजना और राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी। बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि नई टीम प्रदेश संगठन की प्राथमिकताओं को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

