देहरादून ; 27.10.2026,
Karwa Chauth 2026: सुहागिनों में व्रत को लेकर खास उमंग, साड़ी-सूट से लेकर गहनों और पूजा की थालियों तक की खरीदारी में जुटीं महिलाएं; जानिए धार्मिक महत्व और पंचांग के अनुसार पूजा का समय
सुहाग, श्रृंगार और पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक करवा चौथ नजदीक आते ही त्योहार की उमंग लोगों के चेहरों पर दिखाई देने लगी है। 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर महिलाओं में खास उत्साह है। कहीं पसंदीदा साड़ी और सूट चुनने की तैयारी चल रही है तो कहीं चूड़ियों के रंगों का मिलान किया जा रहा है। मेहंदी लगवाने से लेकर पूजा की थाली सजाने तक, महिलाएं करवा चौथ को यादगार बनाने में जुटी हैं। बाजारों में भी त्योहार की रौनक बढ़ने लगी है और दुकानों पर साज-श्रृंगार से जुड़ी खरीदारी का माहौल दिखाई देने लगा है।
करवा चौथ की खास बात यह है कि इसकी तैयारी केवल व्रत वाले दिन तक सीमित नहीं रहती। महिलाएं कई दिन पहले से ही अपने पहनावे, मेकअप, मेहंदी और पूजा की व्यवस्था में जुट जाती हैं। नवविवाहित महिलाओं के लिए पहला करवा चौथ विशेष मायने रखता है। वहीं, लंबे समय से इस परंपरा को निभा रहीं महिलाएं भी हर साल अपने तरीके से पर्व को खास बनाने की तैयारी करती हैं।
बाजारों में बढ़ने लगी रौनक, पारंपरिक पहनावे के साथ नए फैशन की भी धूम
करवा चौथ के करीब आते ही कपड़ों, चूड़ियों, आभूषणों, मेकअप और पूजा सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। महिलाएं त्योहार के लिए पारंपरिक लाल, मरून, गुलाबी और रानी रंग के परिधानों के साथ अपनी पसंद के दूसरे रंग भी तलाश रही हैं। साड़ी, सूट, लहंगा और डिजाइनर ड्रेस के साथ मैचिंग दुपट्टे और आभूषणों को लेकर भी खास तैयारी की जा रही है।
पारंपरिक परिधान के साथ आधुनिक फैशन का मेल भी महिलाओं को आकर्षित कर रहा है। कोई हल्के गहनों के साथ सादगी भरा लुक पसंद कर रही है तो कोई चूड़ियों, बिंदी, मांगटीका और खूबसूरत आभूषणों से अपना सोलह शृंगार पूरा करने की योजना बना रही है। कई महिलाएं ऐसी ड्रेस चुन रही हैं, जिसे पूजा के साथ शाम के पारिवारिक आयोजन में भी पहना जा सके।
चूड़ियों की दुकानों पर रंगों का चुनाव, मेहंदी के लिए भी उत्सुकता
करवा चौथ और चूड़ियों का रिश्ता लंबे समय से भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है। यही वजह है कि इस पर्व की तैयारी में चूड़ियों की खरीदारी का अलग ही उत्साह रहता है। महिलाएं अपने कपड़ों के रंग के अनुसार कांच, मेटल और डिजाइनर चूड़ियों का चुनाव करती हैं। लाल और हरे रंग की पारंपरिक चूड़ियों के साथ मैचिंग कंगन और कड़े भी शृंगार का हिस्सा बनते हैं।
वहीं, हाथों में रचने वाली मेहंदी के बिना करवा चौथ की तैयारियां अधूरी-सी लगती हैं। महिलाएं आकर्षक बेल, फूल-पत्तियों, पारंपरिक आकृतियों और दूल्हा-दुल्हन की डिजाइन वाली मेहंदी पसंद करती हैं। त्योहार के अंतिम दिनों में मेहंदी लगवाने के लिए अधिक मांग रहने की संभावना है, इसलिए पहले से समय तय करने की तैयारी भी की जा रही है।
पूजा की थाली और करवे की खरीदारी भी जरूरी
करवा चौथ पर सजने-संवरने के साथ पूजा की तैयारियों का भी विशेष महत्व है। महिलाएं करवा, छलनी, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री जुटा रही हैं। कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पूजा की थाली को सजाते हैं, जबकि कई महिलाएं बाजार में उपलब्ध सजी-सजाई थालियां पसंद करती हैं।
पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले करवे और अन्य सामग्री को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ पर करवे का इस्तेमाल पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा से जुड़ा है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं पहले से ही जरूरी सामग्री की व्यवस्था कर लेना चाहती हैं, ताकि पूजा के दिन किसी चीज की कमी न रहे।
पहले करवा चौथ को यादगार बनाने की तैयारी
नवविवाहित जोड़ों के लिए पहला करवा चौथ भावनाओं और उत्साह से भरा अवसर होता है। शादी के बाद आने वाले इस विशेष पर्व को लेकर कई महिलाएं अपने पहनावे, मेहंदी और पूजा की तैयारियों पर खास ध्यान देती हैं। परिवार में भी इस दिन को यादगार बनाने के लिए पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तैयारियां की जाती हैं।
कुछ दंपती इस अवसर को एक-दूसरे के साथ समय बिताने, उपहार देने और अपने रिश्ते को खास अंदाज में मनाने के अवसर के रूप में देखते हैं। बदलते समय के साथ पति-पत्नी के साथ मिलकर पूजा की तैयारी करने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की परंपरा भी चर्चा में रहती है।
धार्मिक मान्यताओं में पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख की कामना
हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं और शाम को भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती तथा करवा माता की पूजा करती हैं।
माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और रिश्तों में प्रेम बनाए रखने की कामना करती हैं। भगवान गणेश की पूजा शुभ कार्यों की निर्विघ्न पूर्ति के लिए की जाती है।
करवा चौथ पर वीरवती की कथा सुनने की भी परंपरा है। इस कथा को व्रत के संकल्प, श्रद्धा और धैर्य से जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और कथा के स्वरूप में कुछ अंतर हो सकता है।
पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को रखा जाएगा व्रत
पंचांग के अनुसार, करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। इस दिन महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ समय देखकर व्रत की तैयारियां पूरी कर सकती हैं।
दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग गणना में पूजा का समय शाम लगभग 5:38 बजे से 6:55 बजे तक बताया गया है। चंद्र दर्शन का अनुमानित समय रात करीब 8:15 बजे के आसपास है। हालांकि, चंद्रोदय का समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलता है। देहरादून सहित उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा करने वाली महिलाओं को स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
चांद के दीदार के साथ खुलेगा व्रत
करवा चौथ के दिन महिलाओं को चंद्रमा निकलने का इंतजार रहता है। शाम को पूजा और कथा के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। कई परिवारों में छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने के बाद व्रत खोलने की रस्म निभाई जाती है।
इस तरह करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, पारिवारिक परंपरा और रिश्तों में प्रेम का उत्सव भी है। बाजारों में बढ़ती रौनक, शृंगार की तैयारियां और पहले करवा चौथ को लेकर उमंग इस पर्व के खास माहौल को और खूबसूरत बना रहे हैं। अब महिलाओं को पर्व के दिन का इंतजार है, जब सोलह शृंगार, पूजा-अर्चना और चांद के दीदार के साथ करवा चौथ की परंपराएं पूरी होंगी।

