देहरादून ; 26.10.2026,
देहरादून। महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर देहरादून नगर निगम में आयोजित शोभायात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग कर महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को नमन किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत पर्यावरण मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी करने की दिशा में जल्द कदम उठाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर संबंधित स्तर पर यथाशीघ्र बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि मानदेय वृद्धि को लेकर आगे की कार्रवाई की जा सके।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनकी शिक्षाओं और रामायण में निहित सामाजिक संदेशों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं को जन-जन तक पहुंचाया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यक्ति अपने विचारों, कर्मों और ज्ञान के बल पर समाज को नई दिशा दे सकता है। उनकी शिक्षाएं समानता, सद्भाव और सामाजिक एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देती हैं।
रामायण के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली ऐसी रचना है, जिसमें सत्य, धर्म, त्याग, कर्तव्य और मानवीय संवेदनाओं का गहरा संदेश समाहित है। यह हमें दूसरों के प्रति सम्मान रखने, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को स्वीकार करने की सीख देती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, आचरण और समाज के प्रति योगदान से किया जाना चाहिए। महर्षि वाल्मीकि के विचार आज भी ऐसे समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं, जहां भेदभाव के बजाय समानता और आपसी सहयोग को महत्व मिले। मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव सामाजिक समरसता, सद्भाव और परस्पर सम्मान का मार्ग दिखाती रही है।
राम मंदिर में वाल्मीकि जी को स्थान सामाजिक समरसता का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते वर्षों में भारत की ऐतिहासिक परंपराओं, आध्यात्मिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिली है।
उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को सम्मानजनक स्थान दिया जाना भारतीय परंपरा की व्यापकता और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा जाना उनके योगदान के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को आवास, स्वच्छ ईंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल और खाद्यान्न जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
उत्तराखंड में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में कक्षा एक से 12वीं तक छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और रहने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 15 निःशुल्क छात्रावास, पांच आवासीय विद्यालय और तीन आईटीआई संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण किसी भी विद्यार्थी की प्रगति में बाधा न आने देना है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलना सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि वंचित वर्गों के बच्चे भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर आगे बढ़ें तथा प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
आवास और बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आवासहीन अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को राहत देने के लिए अटल आवास योजना को दोबारा शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत पात्र परिवारों को घर बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति के युवक या युवती से अंतरजातीय विवाह करने पर पात्र लाभार्थियों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल देना और समाज में समान अवसरों की भावना को मजबूत करना है। सरकार चाहती है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने या अपने बच्चों का भविष्य संवारने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
सांस्कृतिक पहचान के साथ विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि ऋषि-मुनियों की तपस्या, प्राचीन परंपराओं और धार्मिक आस्था से समृद्ध है। राज्य के विकास का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिले और किसी भी व्यक्ति को सामाजिक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण पीछे न रहना पड़े। महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समानता, सम्मान और सहयोग पर आधारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों, जनकल्याणकारी योजनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के माध्यम से विकसित उत्तराखंड के संकल्प को साकार किया जाएगा।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
नगर निगम देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में महापौर सौरभ थपलियाल, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना, महानगर भाजपा अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, श्याम अग्रवाल, अशोक वर्मा, नगर आयुक्त आलोक पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उनके विचारों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समानता, सद्भाव तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान का संदेश दिया गया। वहीं, पर्यावरण मित्रों के मानदेय में वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री की घोषणा ने कार्यक्रम में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दे को भी प्रमुखता प्रदान की।

