देहरादून ; 03.09.2026।
देहरादून। अनुसूचित जाति समाज से जुड़े मामलों के समाधान को लेकर उत्तराखण्ड अनुसूचित जाति आयोग की जनसुनवाई में अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं। देहरादून स्थित आयोग कार्यालय में 1 से 3 सितंबर तक चले इस कार्यक्रम में कुल 45 शिकायतों को सुनवाई के लिए लिया गया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की मौजूदगी वाले 26 मामलों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया।
आयोग अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि जनसुनवाई का मकसद उन लोगों को अपनी बात रखने का मंच देना है, जिन्हें अपने अधिकारों या सरकारी व्यवस्थाओं से संबंधित किसी समस्या के समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयोग संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए शिकायतों पर कार्रवाई करता है और कोशिश रहती है कि लोगों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
जनसुनवाई के दौरान टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग पहुंचे। किसी ने जमीन से जुड़े मामले सामने रखे तो किसी ने नौकरी और सेवा से संबंधित अपनी समस्या आयोग के समक्ष रखी। मामलों की प्रकृति के अनुसार संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की गई।
आयोग की सचिव कविता टम्टा ने बताया कि सुनवाई में भूमि की पैमाइश, जमीन पर कब्जे से जुड़े विवाद, भूमि के मालिकाना अधिकार, उत्पीड़न की शिकायतें, आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े सेवा संबंधी मामले, पदोन्नति, सेवा में वापसी और जातिगत भेदभाव से संबंधित प्रकरण शामिल रहे।
आयोग की ओर से अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सुनवाई के दौरान सामने आए मामलों में आवश्यक कार्रवाई निर्धारित समय के भीतर पूरी की जाए। साथ ही आयोग के आदेशों के अनुपालन की स्थिति की निगरानी करने पर भी जोर दिया गया, ताकि शिकायतों को केवल सुनवाई तक सीमित न रखते हुए उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दिलाना भी जरूरी है। आयोग इस दिशा में भी लोगों तक पहुंच बनाने और जरूरतमंदों को उनके अधिकारों से अवगत कराने का प्रयास कर रहा है।
जनसुनवाई में आयोग के सदस्य विशाल मुखिया, सुनीता देवी, भागीरथी कुंजवाल तथा विधि सलाहकार राजू मेहर सहित आयोग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

