11 जून 2026
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि देवभूमि उत्तराखंड में कबीलाई और कट्टरपंथी मानसिकता को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। इसी दिशा में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जुलाई 2026 से प्रदेश में केवल वही मदरसे संचालित होंगे जो सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और शैक्षणिक मानकों का पूर्ण रूप से पालन करेंगे।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आध्यात्मिकता, संस्कृति, ज्ञान और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी रही है। ऐसे में शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रदेश का हर छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बने।
धामी के अनुसार नई व्यवस्था के तहत मदरसों में पारंपरिक धार्मिक अध्ययन के साथ-साथ गणित, विज्ञान, कंप्यूटर, हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि आधुनिक शिक्षा से लैस होने पर छात्र उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी सोच, सामाजिक विभाजन या अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि राज्य की युवा पीढ़ी को संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार द्वारा तैयार किए गए नए ढांचे के अंतर्गत मदरसों का पंजीकरण, नियमित निरीक्षण और शैक्षणिक मूल्यांकन किया जाएगा। निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। शिक्षा विभाग को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
धामी ने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उनका मानना है कि जब सभी बच्चों को आधुनिक और समान शिक्षा मिलेगी, तब समाज में समरसता और राष्ट्रीय एकता और अधिक मजबूत होगी।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा सुधार और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से प्रदेश में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और विद्यार्थियों को आधुनिक भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक कहा कि उत्तराखंड में शिक्षा का वातावरण राष्ट्रवाद, आधुनिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक सद्भाव पर आधारित होगा। देवभूमि की पावन भूमि पर शिक्षा को विकास और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया जाएगा, न कि किसी प्रकार की कट्टरता या संकीर्ण सोच का।

