17 june 2026
हरिद्वार। जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के अधिकार क्षेत्र से जिले के 277 गांवों को बाहर करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन मानचित्र स्वीकृति की जटिल प्रक्रिया और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को प्रमुखता से उठाया।
देवपुरा स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित बैठक में सदस्यों ने कहा कि एचआरडीए का दायरा लगातार बढ़ता गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों को उसके अनुरूप सुविधाएं और विकास कार्य नहीं मिल पा रहे हैं। उनका आरोप था कि प्राधिकरण की भूमिका केवल भवनों के नक्शे पास करने तक सीमित होकर रह गई है, जबकि गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बैठक में कई सदस्यों ने कहा कि ग्रामीणों को मकान निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें बार-बार प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। कई बार प्रक्रिया इतनी जटिल हो जाती है कि आम लोग मजबूरी में बिचौलियों का सहारा लेने को विवश हो जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों का कहना था कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार जिला पंचायत को दिया जाए तो प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधा मिल सकेगी और निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी भी नहीं होगी। साथ ही गांवों में विकास योजनाओं को गति मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
बैठक के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि एचआरडीए मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए गठित किया गया था, जबकि उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल कई गांव अब भी पूरी तरह ग्रामीण स्वरूप में हैं। ऐसे में इन गांवों को प्राधिकरण के दायरे से बाहर कर स्थानीय निकायों के माध्यम से विकास कार्यों को संचालित करना अधिक व्यावहारिक होगा।
जिला पंचायत बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद अब इसे आगे की कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर भेजा जाएगा। यदि शासन से भी मंजूरी मिलती है तो हरिद्वार जिले के 277 गांवों को एचआरडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
ग्रामीणों को मिल सकती है बड़ी राहत
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में ग्रामीणों को भवन निर्माण संबंधी अनुमतियों के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की व्यवस्था मजबूत होने से गांवों में विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

