देहरादून ; 27.08.2026,
देहरादून। उत्तराखंड में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष रखे गए दो अहम प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया है कि दोनों प्रस्तावों को संबंधित विभाग और प्रभाग के स्तर पर परीक्षण के लिए भेजा गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के अंतर्गत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और पैरामेडिकल कॉलेज स्थापित करने की आवश्यकता केंद्र के समक्ष रखी थी। इन प्रस्तावों का उद्देश्य प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।
केंद्रीय मंत्री नड्डा के पत्र के अनुसार, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़े प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संबंधित विभाग/प्रभाग के परीक्षण के लिए भेजा गया है। प्रस्ताव की जांच के दौरान प्रदेश में उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं की आवश्यकता और इससे होने वाले संभावित लाभों पर विचार किया जाएगा।
इसी तरह पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंत्रालय के संबंधित प्रभाग के पास परीक्षण के लिए भेजा गया है। इस संस्थान के माध्यम से लैब टेक्नीशियन, रेडियोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, आपातकालीन सेवाओं और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों को तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को कई बार बड़े शहरों और राज्य से बाहर के संस्थानों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना होने पर हृदय रोग, न्यूरो, कैंसर, किडनी समेत अन्य जटिल रोगों के उपचार के लिए राज्य में ही उन्नत चिकित्सा सेवाओं का आधार मजबूत किया जा सकेगा।
वहीं, पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जरूरी तकनीकी स्टाफ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री धामी ने दोनों प्रस्तावों के केंद्रीय स्तर पर परीक्षण को उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सकारात्मक पहल बताया है। राज्य सरकार का मानना है कि इन संस्थानों की स्थापना से चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रोजगार के अवसरों को भी नई गति मिल सकती है।
फिलहाल दोनों प्रस्ताव विभागीय परीक्षण की प्रक्रिया में हैं। केंद्र स्तर पर आगे की प्रक्रिया और स्वीकृति के बाद इन योजनाओं के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

