4 august 2026 ; Dehradun।
संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन चुकीं 29 वर्षीय रेशम फातिमा ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के सामने साहस की नई कहानी पेश की है। भारत की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में रेशम का चयन ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चेवनिंग स्कॉलरशिप के लिए हुआ है। इस स्कॉलरशिप के तहत वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में जेंडर, डेवलपमेंट एंड ग्लोबलाइजेशन विषय में एमएससी की पढ़ाई करेंगी।
शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर हुआ था हमला
रेशम फातिमा की जिंदगी ने साल 2014 में दर्दनाक मोड़ लिया, जब वह लखनऊ में 11वीं कक्षा की छात्रा थीं। शादी का प्रस्ताव अस्वीकार करने से नाराज एक रिश्तेदार ने उन पर एसिड अटैक कर दिया। इस हमले ने उनके चेहरे को गंभीर रूप से झुलसा दिया, लेकिन उनके आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छा को कमजोर नहीं कर सका।
बहादुरी के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
इस कठिन दौर का डटकर सामना करने वाली रेशम को वर्ष 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के सर्वोच्च बाल वीरता सम्मान ‘भारत अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें ‘रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार’ प्रदान कर उनके साहस को सलाम किया।
इलाज के बीच भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
कई सर्जरी और लंबे इलाज के बावजूद रेशम ने अपनी शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया। उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद वर्ष 2018 में जामिया मिलिया इस्लामिया से फिजिक्स ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पॉलिटिक्स एंड इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर डिग्री पूरी की।
शिक्षा और नेतृत्व के लिए शुरू किया फाउंडेशन
साल 2023 में रेशम ने ‘इब्राह फाउंडेशन’ की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से वह आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा, नेतृत्व विकास, करियर मार्गदर्शन और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जीवनसाथी ने बढ़ाया हौसला
वर्ष 2024 में रेशम का विवाह असगर से हुआ। रेशम के अनुसार, असगर ने उन्हें वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और चेवनिंग स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने का आत्मविश्वास भी दिया।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
रेशम फातिमा की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं। साहस, शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं। अब लंदन में उच्च शिक्षा हासिल कर वह वैश्विक स्तर पर महिलाओं के अधिकार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं।

