देहरादून ; 03.09.2026।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और ग्रामीण उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं अब और मजबूत होती नजर आ रही हैं। देहरादून में संचालित ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के फ्लैगशिप स्टोर का विदेशी भारतीय मिशनों में तैनात वरिष्ठ राजनयिकों ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की स्थानीय उपज, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उनसे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जाना।
राजनयिकों ने स्टोर में प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों की जानकारी लेते हुए उनकी पैकेजिंग, गुणवत्ता और प्रस्तुति की सराहना की। खास बात यह रही कि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में आधिकारिक आयोजनों के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले उपहारों के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के विशेष गिफ्ट हैम्पर तैयार कराने को लेकर भी उन्होंने रुचि दिखाई। इसे उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार खुलने की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।
यह प्रतिनिधिमंडल विदेश मंत्रालय के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान के मिड-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के आधिकारिक दौरे पर आया था। प्रतिनिधिमंडल में जाम्बिया की राजधानी लुसाका में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा, लिथुआनिया के विनियस में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जमैका के किंग्स्टन में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी शामिल रहे।
खेत से शिल्प तक, पहाड़ की विविधता एक ही मंच पर
दौरे के दौरान राजनयिकों को बताया गया कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ महज उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कौशल को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश भी है। इसके तहत कृषि और बागवानी से मिलने वाली उपज के साथ हस्तशिल्प, गैर-काष्ठ वन उत्पाद, स्थानीय जड़ी-बूटियां, मसाले और अन्य पारंपरिक वस्तुओं को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
राजनयिकों ने उत्पादों में उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान की झलक को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना रहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान से तैयार इन वस्तुओं को बेहतर ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने पर इनकी मांग का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
महिला समूहों की मेहनत बनी आकर्षण का केंद्र
इस पूरे प्रयास में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं कई स्तरों पर उत्पादन व्यवस्था का हिस्सा हैं। खेती और स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर प्रसंस्करण, उत्पाद तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने में उनकी भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।
राजनयिकों ने माना कि इस तरह के प्रयासों से पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं को अपने घर और गांव के स्तर पर ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलता है। इससे रोजगार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यम विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
स्थानीय कारीगरों और बड़े बाजार के बीच सेतु
प्रतिनिधिमंडल ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की प्रबंध निदेशक झरना कामठान के नेतृत्व में संचालित पहलों की भी सराहना की। इस ब्रांड को ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में काम कर रहे कारीगरों और उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने में मदद कर सकता है।
यदि विदेशी भारतीय मिशनों के लिए उपहार सामग्री के रूप में उत्तराखंड के उत्पादों को नियमित स्थान मिलता है, तो इसका सीधा फायदा राज्य के उत्पादकों और कारीगरों को मिल सकता है। राजनयिक कार्यक्रमों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत और आधिकारिक आयोजनों में इन उत्पादों की मौजूदगी उत्तराखंड की पहचान को भी नए तरीके से प्रस्तुत कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बढ़ा एक और कदम
विदेशी मिशनों के प्रतिनिधियों की ओर से गिफ्ट हैम्पर में रुचि को राज्य के स्थानीय उत्पादों के लिए संभावित निर्यात बाजार की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है। इससे उत्तराखंड की पहाड़ी उपज और हस्तशिल्प को केवल घरेलू बाजार तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता और पारंपरिक शिल्प को एक साझा मंच मिल रहा है। अब राजनयिक स्तर पर बनी यह रुचि यदि आगे ठोस बाजार और खरीद के अवसरों में बदलती है, तो प्रदेश के ग्रामीण उत्पादकों के लिए यह नई आर्थिक संभावनाओं का द्वार खोल सकती है।

