4 july 2026,
गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह को अंतरराष्ट्रीय धातु कारोबार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) ने अडानी कॉपर ब्रांड को अपने कॉपर कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत डिलीवरी योग्य ब्रांड के रूप में मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के बाद अडानी कॉपर को वैश्विक खरीदारों और कारोबारियों के बीच नई पहचान मिलेगी, जिससे कंपनी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदगी और मजबूत होने की संभावना है।
एलएमई द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 10 जुलाई से अडानी कॉपर ब्रांड के लिए वारंट जारी किए जा सकेंगे। साथ ही एलएमई से जुड़े गोदामों को अपने ऑफ-वारंट स्टॉक में अडानी कॉपर को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह मंजूरी कंपनी द्वारा वर्ष 2025 में किए गए आवेदन के बाद मिली है।
मुंद्रा स्थित प्लांट बना भारत की बड़ी ताकत
अडानी कॉपर का उत्पादन अडानी एंटरप्राइजेज की सहयोगी कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड द्वारा गुजरात के मुंद्रा में किया जा रहा है। लगभग 1.2 अरब डॉलर की लागत से विकसित यह संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन कॉपर स्मेल्टर प्लांट्स में गिना जाता है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन है, जिससे देश में कॉपर उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आयात पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद
भारत में बिजली, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से देश की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। हाल के वर्षों में भारत ने रिफाइंड कॉपर के आयात में कमी दर्ज की है और विशेषज्ञों का मानना है कि नए उत्पादन से यह गिरावट आगे भी जारी रह सकती है।
वैश्विक कारोबार को मिलेगा नया अवसर
एलएमई की मान्यता किसी भी धातु उत्पादक के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का बड़ा प्रमाण मानी जाती है। इसके बाद अडानी कॉपर को अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग नेटवर्क में अधिक आसानी से स्वीकार किया जाएगा। साथ ही कंपनी के लिए वैश्विक वित्तीय संस्थानों से फंड जुटाना और विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बनाना भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा मजबूती का आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल अडानी समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी सकारात्मक संकेत है। यदि घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता इसी तरह बढ़ती रही तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक कॉपर सप्लाई चेन में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। इससे औद्योगिक विकास, रोजगार और निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

