देहरादून ; 03.09.2026।
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के कुलपति पद को लेकर चल रही अस्थायी व्यवस्था अब समाप्त हो गई है। उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को कुमाऊं विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। नियुक्ति संबंधी आदेश 3 सितंबर 2026 को जारी हुआ है।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973, जो उत्तराखंड में प्रभावी है, की धारा 12 की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों के आधार पर की गई है। आदेश के साथ ही इससे पहले 31 अगस्त 2026 को कुलपति पद के दायित्वों को लेकर जारी अंतरिम व्यवस्था संबंधी आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है।
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति हैं प्रो. बिष्ट
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट वर्तमान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। अब उन्हें कुमाऊं विश्वविद्यालय जैसे राज्य के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में कुलपति पद को लेकर हाल के दिनों में प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले थे। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के कार्यकाल से जुड़ी व्यवस्था के बाद प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को 1 सितंबर 2026 से नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया था। अब नियमित कुलपति की नियुक्ति के साथ यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त हो गई है।
विश्वविद्यालय के सामने कई अहम जिम्मेदारियां
नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ शोध, नवाचार, कौशल विकास तथा विद्यार्थियों के लिए रोजगारोन्मुख अवसर बढ़ाने जैसी प्राथमिकताएं रहेंगी। राज्यपाल पहले भी कुमाऊं विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठकों में शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, नवाचार और विद्यार्थियों के कौशल विकास को प्रमुखता देने पर जोर दे चुके हैं।
लोक भवन की ओर से जारी नियुक्ति आदेश की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, महालेखाकार तथा संबंधित विश्वविद्यालय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आने के बाद विश्वविद्यालय में नियमित प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर बनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। अब उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

