देहरादून ; 27.08.2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड के दीर्घकालिक और संतुलित विकास को लेकर राज्य सरकार और विश्व बैंक के बीच महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन से विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई तथा उनकी टीम ने सचिवालय में मुलाकात की। बैठक में उत्तराखण्ड के विकास की मौजूदा प्राथमिकताओं के साथ वर्ष 2047 तक राज्य को अधिक सक्षम, टिकाऊ और आपदा-रोधी बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जल संरक्षण, नदियों का पुनर्जीवन, जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन को राज्य के भविष्य के लिए बेहद अहम विषय बताया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ऐसी विकास व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में नदियों के पुनर्जीवन और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जल संकट की भविष्य की चुनौती को देखते हुए वर्षा जल संचयन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय संसाधनों के साथ तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया गया।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड के लिए जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, जल उपलब्धता और आपदा जोखिम को साथ लेकर चलने की जरूरत है, ताकि आने वाले वर्षों में राज्य की विकास प्रक्रिया अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बन सके।
पलायन रोकने पर स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता
बैठक में पलायन और आजीविका का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही परिस्थितियों के अनुरूप रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं
शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्कूली शिक्षा के स्तर में सुधार, तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा, आजीविका और पलायन जैसे विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में समन्वित तरीके से दीर्घकालिक निवेश जरूरी है। इस दिशा में विश्व बैंक से वित्तीय और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी।
बैठक में राज्य के ऊर्जा, वित्त और पेयजल क्षेत्रों में संचालित योजनाओं एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की भी जानकारी विश्व बैंक की टीम के साथ साझा की गई। अधिकारियों ने प्रदेश की विकास आवश्यकताओं और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया।
विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखण्ड के लिए दीर्घकालिक सहयोग और तकनीकी सहायता की दिशा में सकारात्मक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव नरेंद्र सिंह भंडारी, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डे तथा विश्व बैंक की ओर से जोहांस जट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

