31 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। पर्वतीय और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। वर्षों तक ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के लोगों को बेहतर इलाज के लिए देहरादून, हल्द्वानी या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीक का उपयोग और मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में कम से कम एक सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करना है। इसी दिशा में अल्मोड़ा और हरिद्वार मेडिकल कॉलेजों का संचालन शुरू होने से मेडिकल शिक्षा को नई गति मिली है और एमबीबीएस सीटों में भी वृद्धि हुई है। वहीं पिथौरागढ़ के जगजीवन राम मेडिकल कॉलेज और रुद्रपुर के पंडित राम सुमेर शुक्ला मेडिकल कॉलेज में अस्पताल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं तथा शैक्षणिक सत्र प्रारंभ करने की तैयारियां चल रही हैं। टिहरी और पौड़ी में भी मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना रहा है कि राज्य के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के अनुरूप चिकित्सा सुविधाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। ऋषिकेश एम्स के अलावा ऊधमसिंह नगर के किच्छा में एम्स का सैटेलाइट सेंटर विकसित किया जा रहा है। वहीं देहरादून के हरावाला में 300 बेड का आधुनिक कैंसर अस्पताल तैयार किया गया है, जिससे राज्य के कैंसर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी।
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई हेली-एम्बुलेंस सेवा राज्य की एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इस सुविधा के माध्यम से दुर्घटना या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से एयरलिफ्ट कर सीधे एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जा रहा है। इससे ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है और कई मरीजों के लिए यह सेवा जीवनरक्षक साबित हो रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों तक जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाने और ब्लड सैंपल को कम समय में प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक का सफल प्रयोग किया गया है। इससे पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गति और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने व्यापक कवरेज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। अटल आयुष्मान योजना के तहत राशन कार्ड धारक परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही 70 वर्ष से अधिक आयु के लाखों बुजुर्गों को भी इस योजना के दायरे में शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा और विस्तृत किया गया है।
सरकारी अस्पतालों में 207 प्रकार की पैथोलॉजी जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन और डायलिसिस जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिससे मरीजों को अपने ही जिले में बेहतर इलाज मिलने लगा है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में 1,200 से अधिक डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्तियां कर चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता भी दिया जा रहा है, ताकि दुर्गम क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, डिजिटल तकनीक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले वर्षों में यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो प्रदेश के दूरस्थ गांवों तक भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य और मजबूत होगा।

