देहरादून ; 26.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड के चारधामों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुहिम अब धरातल पर व्यापक असर दिखाने लगी है। मुख्यमंत्री के आह्वान के बाद जहां चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है, वहीं यात्रा व्यवस्थाओं से जुड़े विभागों ने भी कचरा प्रबंधन को लेकर अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। यही वजह है कि मौजूदा यात्रा सीजन में अब तक चारधाम क्षेत्रों और यात्रा मार्गों से करीब 798 टन कचरा एकत्रित किया जा चुका है।
धामी सरकार की ओर से चारधाम यात्रा को केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित न रखते हुए इसे हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। धामों में बढ़ती भीड़ के बीच कचरे की चुनौती को देखते हुए प्लास्टिक को अलग करने, ठोस अपशिष्ट को कॉम्पेक्ट करने, रिसाइकिल योग्य सामग्री को दोबारा उपयोग में लाने और जैविक कचरे से खाद तैयार करने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार चारधाम की पवित्रता के साथ हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं। उनके आह्वान का असर प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ श्रद्धालुओं और स्थानीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
केदारनाथ में प्लास्टिक कचरे पर विशेष निगरानी
केदारनाथ धाम में नगर पंचायत क्षेत्र के भीतर इस यात्रा सीजन में अब तक 32 टन ठोस कचरा एकत्र किया गया है। इसमें अकेले 20 टन प्लास्टिक कचरा शामिल है। प्लास्टिक की बड़ी मात्रा को देखते हुए इसके पृथक्करण और आगे के निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कचरा प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने के लिए शहरी विकास विभाग ने केदारनाथ में एक अतिरिक्त कॉम्पेक्टर मशीन भी स्थापित की है। इसके माध्यम से एकत्रित ठोस कचरे को व्यवस्थित कर गौरीकुंड पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद इस सामग्री को नीलामी के माध्यम से आगे भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
केदारनाथ धाम के पैदल यात्रा मार्ग की सफाई व्यवस्था सुलभ इंटरनेशनल के जिम्मे है। संस्था द्वारा इस यात्रा सीजन में अब तक 270 टन सॉलिड वेस्ट एकत्र किया गया है। इसमें से करीब 6.5 टन प्लास्टिक कचरा रिसाइकिलिंग के लिए भेजा जा चुका है।
बदरीनाथ में 393 टन कचरा एकत्र
बदरीनाथ धाम में भी कचरा प्रबंधन अभियान बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा है। यहां यात्रा सीजन में अब तक 393 टन कचरा एकत्र हो चुका है। इसमें करीब 161 टन सूखा कचरा शामिल है।
बदरीनाथ नगर पंचायत की ओर से धाम क्षेत्र में ही ठोस कचरे को कॉम्पेक्ट किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 24 टन प्लास्टिक कचरा अलग किया जा चुका है। इसमें पानी की बोतलों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। अलग किए गए प्लास्टिक को नीलामी के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह व्यवस्था इस बात की ओर भी इशारा करती है कि यात्रा के दौरान निकलने वाले कचरे को केवल हटाने के बजाय उसकी उपयोगिता और दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
गंगोत्री में कचरे से कमाई और खाद का निर्माण
गंगोत्री धाम में यात्रा सीजन के दौरान अब तक 98 टन कचरा एकत्र किया जा चुका है। नगर पंचायत ने इसमें से 22 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल किया है। इसके जरिए करीब 55 हजार रुपये की आय भी प्राप्त हुई है।
गंगोत्री में कचरा प्रबंधन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जैविक अपशिष्ट का उपयोग है। यहां कचरे से करीब 2.5 टन खाद तैयार की जा चुकी है। इसके अलावा धाम क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए नगर पंचायत की ओर से प्रतिदिन विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
यमुनोत्री में यात्रा मार्ग से 4.85 टन प्लास्टिक हटाया
यमुनोत्री धाम के यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था जिला पंचायत संभाल रही है। यहां अब तक 4.85 टन प्लास्टिक कचरा एकत्र कर सुरक्षित तरीके से निस्तारित किया गया है।
जानकीचट्टी बाजार से ग्रामीण बाजार डामटा तक के क्षेत्र में 1,790 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया, जबकि जानकीचट्टी से खरसाली बाजार क्षेत्र के बीच 3,060 किलो प्लास्टिक हटाया गया।
यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक कचरे का अलग से संग्रहण किए जाने से इसे खुले में फैलने से रोकने में मदद मिल रही है।
धामी बोले- आस्था के साथ हिमालय की सेहत भी जरूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम स्वच्छता अभियान के सकारात्मक परिणामों पर जोर देते हुए कहा कि चारधाम केवल धार्मिक आस्था और संस्कृति के केंद्र नहीं हैं, बल्कि हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
धामी ने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। चारों धामों को प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण और प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी प्रयास तभी पूरी तरह सफल होंगे, जब इसमें श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की भागीदारी भी मजबूत हो। यात्रा के दौरान प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल, कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना और स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग करना इस अभियान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सफाई से आगे बढ़कर बन रहा पर्यावरण संरक्षण का मॉडल
चारधाम में जारी अभियान की खास बात यह है कि अब कचरे को केवल समस्या के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि उसके वर्गीकरण और उपयोग की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कहीं प्लास्टिक को रिसाइकिल कर आय अर्जित की जा रही है तो कहीं जैविक कचरे से खाद तैयार हो रही है। वहीं कॉम्पेक्टर मशीनों के जरिए कचरे के परिवहन और भंडारण को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से चारधाम यात्रा को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर लगातार दिए जा रहे जोर के बीच सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि स्वच्छता अभियान अब केवल अपील तक सीमित नहीं है, बल्कि धामों और यात्रा मार्गों पर इसके लिए नियमित स्तर पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों का लक्ष्य चारधाम क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को और कम करना तथा हिमालयी पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं को स्वच्छ यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

