देहरादून ; 22.08.2026,
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित The Economic Times World Leaders Forum 2026 में राज्य की विकास यात्रा और भविष्य की प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका सामने रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन, सुशासन, रोजगार, पर्यटन और सीमांत क्षेत्रों के उत्थान को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को राज्य के सुशासन मॉडल की प्रमुख उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से समान अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में नई पहल हुई है। उनके अनुसार यूसीसी लागू होने के बाद महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को अधिक मजबूती मिली है।
रोजगार और पारदर्शी भर्ती पर जोर
मुख्यमंत्री ने रोजगार के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य गठन के शुरुआती करीब दो दशकों में लगभग 16 हजार सरकारी नियुक्तियां हुई थीं, जबकि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं और नकल व पेपर लीक से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को जेल भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खोलना है।
शिक्षा में समान अवसर की दिशा में कदम
शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था किए जाने का उल्लेख किया। साथ ही मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
निवेश के लिए बदला कारोबारी माहौल
2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को राज्य की औद्योगिक यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए धामी ने कहा कि आयोजन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल एमओयू तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर जोर दिया है।
निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां लागू किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणाम अब निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग के रूप में दिखाई दे रहे हैं। बेहतर कानून-व्यवस्था और बिजली की निर्बाध उपलब्धता को भी उद्योगों के लिए जरूरी आधार बताया गया।
सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 125 किलोमीटर लंबी है और इसके पूरा होने पर पर्वतीय क्षेत्रों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से राजधानी दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा आसान होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को औद्योगिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों के रूप में रेखांकित करते हुए उन्होंने पंतनगर के प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को भी भविष्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक विस्तार से जोड़कर देखा।
पर्यटन को बनाया जा रहा बारह महीने का रोजगार क्षेत्र
धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। चारधाम, कांवड़ और आदि कैलाश यात्राओं में बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक और शीतकालीन पर्यटन को भी विस्तार दिया जा रहा है।
हर्षिल-मुखवा जैसे इलाकों को विंटर टूरिज्म के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना का उद्देश्य सर्दियों में भी पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखना है। इससे होमस्टे, होटल, ढाबे, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों के लिए आय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
सीमांत गांवों को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गांवों को ‘प्रथम गांव’ की सोच के साथ विकसित किया जा रहा है। उनका जोर सड़क, संचार, पर्यटन और स्थानीय आजीविका जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर है।
आदि कैलाश क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी लाभ मिल रहा है।
एआई और नवाचार पर भी फोकस
उत्तराखण्ड को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भी काम किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही। राज्य में नवाचार नीति लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास का अगला चरण तकनीक और नई सोच से जुड़ा होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है जिसमें आर्थिक वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और स्थानीय आजीविका को भी महत्व मिले।
जनवरी 2027 के कुंभ के लिए तैयारियां तेज
मुख्यमंत्री ने आगामी जनवरी 2027 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ को लेकर भी सरकार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयोजन को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान धामी ने देशवासियों और उपस्थित लोगों को हरिद्वार कुंभ में शामिल होने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड विकास, आस्था, संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि उत्तराखण्ड का विकास मॉडल केवल परियोजनाओं और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका केंद्र युवा रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, सीमांत क्षेत्रों की मजबूती, बेहतर सुविधाएं और टिकाऊ विकास है।

