देहरादून ; 04.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ ले रहे लाखों लोगों के लिए राज्य सरकार ने अगस्त माह की पेंशन राशि जारी कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से वन-क्लिक व्यवस्था के जरिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं की अगस्त 2026 की किस्त का ऑनलाइन भुगतान किया। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश के 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल 147 करोड़ 5 लाख 51 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य पेंशन भुगतान को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाए रखना है, ताकि वृद्धजन, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों, किसानों और अन्य पात्र वर्गों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अगस्त में 5,605 नए लोगों को पेंशन की मंजूरी
अगस्त माह के दौरान सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में 5,605 नए लाभार्थियों को पेंशन स्वीकृत की गई है। इनमें सबसे अधिक 3,945 वृद्धावस्था पेंशन, 1,000 विधवा पेंशन और 416 दिव्यांग पेंशन के मामले शामिल हैं।
इसके अलावा 106 किसान पेंशन, 23 परित्यक्ता पेंशन तथा 115 भरण-पोषण अनुदान के लाभार्थियों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे को लगातार बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता में कमजोर और जरूरतमंद वर्ग
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को सहारा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र लोगों को पेंशन का लाभ मिलने में किसी प्रकार की व्यावहारिक बाधा उत्पन्न न हो और यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसका मानवीय दृष्टिकोण के साथ समाधान किया जाए।
उन्होंने पेंशन व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा लाभार्थी केंद्रित बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र व्यक्ति तक उसका लाभ बिना परेशानी और निर्धारित समय पर पहुंच सके।
आधार की समस्या से नहीं रुकेगी पेंशन
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उन पात्र लोगों की समस्या का संज्ञान लिया, जिनका किसी कारणवश आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे लाभार्थियों को अलग से चिन्हित करने और उनके लिए अकाउंट बेस्ड पेमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य यह है कि केवल आधार संबंधी तकनीकी या दस्तावेजी समस्या के कारण किसी पात्र व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित न होना पड़े। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में व्यावहारिक समाधान तैयार करने को कहा।
करीब 7.77 लाख लाभार्थी राज्य योजनाओं के दायरे में
प्रस्तुतीकरण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2026 के लिए वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली और बौना पेंशन योजनाओं के तहत कुल 9,91,914 लाभार्थियों के लिए पेंशन राशि निर्धारित की गई है।
इनमें 2,14,711 लाभार्थी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत आते हैं, जबकि 7,77,203 लाभार्थी राज्य स्तर की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े हुए हैं।
अगस्त माह में जारी कुल राशि में लगभग 140 करोड़ 11 लाख रुपये राज्यांश और करीब 6 करोड़ 94 लाख रुपये केंद्रांश के रूप में शामिल हैं।
दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन पर भी चर्चा
बैठक के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से 18 और 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, जनपथ में दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है।
इस सम्मेलन में केंद्र सरकार, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों, प्राथमिकताओं और योजनाओं को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा। उत्तराखंड से जुड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के अनुभवों पर भी ऐसे मंचों पर चर्चा की संभावनाएं हैं।
बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजानदास, सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव विक्रम यादव, संयुक्त सचिव धीरेंद्र सिंह, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, सहायक निदेशक हेमलता पांडेय समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राज्य सरकार का जोर अब पेंशन वितरण की प्रक्रिया को केवल नियमित भुगतान तक सीमित रखने के बजाय उसे अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर है। साथ ही, जिन पात्र लोगों को दस्तावेज, आधार या अन्य व्यावहारिक अड़चनों के कारण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें चिन्हित कर व्यवस्था में शामिल करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

