देहरादून ; 1अक्टूबर 2026,
देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण को पर्यटन और स्थानीय रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। एफआरआई कैंपस, देहरादून में वन्यजीव सप्ताह-2026 के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विकास की गति के साथ जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण की सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संघर्ष के बीच साहस का परिचय देकर दूसरे लोगों की जान बचाने वाले 18 नागरिकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित लोगों को 51-51 हजार रुपये की धनराशि देने की घोषणा की। इस मौके पर वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदर्शनी और विभिन्न विभागों के स्टॉलों का भी मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। वन्यजीव विषयक निबंध प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
धामी ने रखा संरक्षण के साथ विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की असली ताकत उसकी प्राकृतिक संपदा है। हिमालय, जंगल, नदियां, झीलें और समृद्ध जैव-विविधता राज्य को विशिष्ट पहचान देते हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाओं के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के रास्तों का भी संरक्षण हो।
उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने के निर्देश दिए। इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने के साथ प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
कॉर्बेट से राजाजी तक बाघ संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। वहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन को विकसित करने की संभावनाओं पर भी सरकार आगे बढ़ रही है।
धामी ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि वन्यजीव संरक्षण की योजनाओं को इस तरह आगे बढ़ाया जाए कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलें। सरकार इको-टूरिज्म और होमस्टे जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है।
हल्द्वानी में चिड़ियाघर की योजना पर आगे बढ़ेगा काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। इस परियोजना को आगे बढ़ाते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
युवाओं को प्रकृति आधारित रोजगार से जोड़ने की पहल
धामी ने कहा कि “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” पहल के माध्यम से एक लाख युवाओं को प्रकृति और वन्यजीव आधारित गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म से जुड़े कौशल को रोजगार एवं उद्यम के अवसरों में बदलने पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। जंगलों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना संरक्षण के प्रयासों को व्यापक सफलता नहीं मिल सकती। इसी सोच के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार और संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रभावितों को बढ़ी आर्थिक मदद
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए सरकार की सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि को 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया है। हमले में घायल नागरिकों के उपचार का खर्च भी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जंगलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।
धामी की अपील—पर्यटन के साथ प्रकृति की जिम्मेदारी भी निभाएं
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने प्लास्टिक का इस्तेमाल और कचरा फैलाने से बचने तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रकृति और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। वन्यजीव सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में आयोजित होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों को संरक्षण के प्रति जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक सविता कपूर और राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल और प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

