देहरादून ; 12.09.2026।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में 41वीं बड़ी उपलब्धि, कठिन हिमालयी चट्टानों के बीच पूरा हुआ अहम सुरंग निर्माण कार्य
देहरादून/ऋषिकेश। उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना ने निर्माण के मोर्चे पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों तक बेहतर परिवहन सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच परियोजना की 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) के ऋषिकेश PIU की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण टनल को आर-पार जोड़ने में सफलता हासिल की। इसके साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब तक 41 टनल ब्रेकथ्रू पूरे हो चुके हैं। परियोजना के लिए यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां लगातार चुनौती पेश करती हैं।
धामी सरकार की प्राथमिकता को मिल रही जमीन पर मजबूती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और राज्य के दूरस्थ इलाकों को आधुनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार जोर देते रहे हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना इसी व्यापक कनेक्टिविटी विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस रेल लाइन के तैयार होने से चारधाम क्षेत्र के साथ-साथ बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं तथा स्थानीय आबादी के लिए परिवहन व्यवस्था को दीर्घकाल में मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पहाड़ों में आवागमन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
10.847 किमी की सुरंग, सामने थीं भूगर्भ की बड़ी चुनौतियां
एस्केप टनल-1 परियोजना की दूसरी सबसे लंबी टनल है। इसकी खुदाई ऐसे भूभाग में की गई, जहां चट्टानों की संरचना बेहद जटिल और अस्थिर प्रकृति की थी। टनल का बड़ा हिस्सा अत्यधिक टेक्टोनाइज्ड, बहु-वलित और कई स्थानों पर फॉल्ट से प्रभावित रॉक मास से होकर गुजरता है।
निर्माण के दौरान कई हिस्सों में चट्टानों के भीतर व्यापक शियरिंग और अत्यधिक क्रश्ड रॉक की स्थिति सामने आई। इसके कारण खुदाई के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों का लगातार आकलन करना और निर्माण पद्धति को परिस्थितियों के अनुसार अपनाना जरूरी रहा।
टनल क्षेत्र में मोटे माइलोनाइट जोन भी मिले। विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह इलाका मेन बाउंड्री थ्रस्ट यानी MBT के निकट स्थित है। ऐसे भूगर्भीय जोन में चट्टानों की प्रकृति सामान्य पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक जटिल हो सकती है।
इंजीनियरों और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास का नतीजा
एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू हासिल होना केवल मशीनों और तकनीक की सफलता नहीं है। इसके पीछे परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, भू-तकनीकी विशेषज्ञों, अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, ठेकेदारों और श्रमिकों की लंबी मेहनत शामिल रही।
हिमालय में लंबी सुरंग की खुदाई के दौरान हर चरण में सुरक्षा और भूगर्भीय निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। चट्टानों की बदलती स्थिति के बीच निर्माण कार्य को आगे बढ़ाते हुए टीम ने आखिरकार सुरंग को दोनों छोर से जोड़ने का लक्ष्य पूरा किया।
अब सिर्फ पांच ब्रेकथ्रू बाकी
एस्केप टनल-1 के पूरा होने के बाद परियोजना में अब तक कुल 41 ब्रेकथ्रू हासिल किए जा चुके हैं। परियोजना में अब पांच ब्रेकथ्रू शेष बताए जा रहे हैं, जिन्हें अगले एक वर्ष के भीतर पूरा किए जाने की उम्मीद है।
यह प्रगति बताती है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अपने निर्माण के एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। प्रत्येक नए टनल ब्रेकथ्रू के साथ परियोजना के बड़े हिस्से का निर्माण लक्ष्य पूरा होने की ओर बढ़ रहा है।
पहाड़ों में विकास की नई पटरी तैयार करने की दिशा में कदम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के लिए केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों को देश के आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने की दीर्घकालिक पहल है। दुर्गम पहाड़ों के बीच सुरंगों और पुलों के माध्यम से रेल लाइन तैयार करना इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद कठिन काम है।
एस्केप टनल-1 का सफल ब्रेकथ्रू इसी चुनौतीपूर्ण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार जिस तरह पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ रही है, उसमें इस परियोजना की प्रगति को अहम माना जा रहा है।
41 टनल ब्रेकथ्रू पूरे होने के बाद अब निगाहें शेष पांच ब्रेकथ्रू पर हैं। इनके पूरा होने के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना निर्माण के एक और बड़े पड़ाव को पार करेगी और उत्तराखंड के पहाड़ों में आधुनिक रेल संपर्क का सपना जमीन पर और मजबूत आकार लेगा

