देहरादून ; 26.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने असाधारण साहस, बहादुरी और मानवीय संवेदना का परिचय देने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप राज्य में ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ योजना लागू करने के लिए शासन की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस योजना का संचालन महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाएगा।
शासन द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक योजना के तहत ऐसे बच्चों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में असाधारण साहस दिखाया हो, किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो, कठिन परिस्थितियों में धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया हो या मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा उल्लेखनीय कार्य किया हो।
27 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन
इस वर्ष पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगी। इच्छुक पात्र बच्चों से संबंधित आवेदन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जा सकेंगे। वहीं, आगामी वर्षों में पुरस्कार के लिए आवेदन करने की निर्धारित अवधि 1 सितंबर से 30 सितंबर तक रहेगी।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव चंद्रेश कुमार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में योजना के उद्देश्य, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।
6 से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे होंगे पात्र
योजना का लाभ ऐसे बच्चों को दिया जाएगा जिनकी आयु छह वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम हो। सरकार का उद्देश्य बच्चों में साहस, पराक्रम, आत्मविश्वास और मानवीय संवेदनाओं को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही ऐसी परिस्थितियों में शांतिपूर्वक और समझदारी से निर्णय लेने की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जहां सामान्य परिस्थितियों से अलग चुनौती का सामना करना पड़ा हो।
असाधारण कार्यों को मिलेगा प्रोत्साहन
योजना के तहत केवल शारीरिक बहादुरी ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से किए गए उल्लेखनीय कार्यों को भी महत्व दिया जाएगा। किसी संकट में दूसरे व्यक्ति की सहायता करना, जोखिम के बावजूद साहसिक कदम उठाना या कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखते हुए प्रभावी भूमिका निभाना जैसे कार्य पुरस्कार के लिए विचार के दायरे में आ सकते हैं।
सरकार का मानना है कि बच्चों के ऐसे साहसिक कार्यों को सार्वजनिक रूप से पहचान और सम्मान मिलने से अन्य बच्चों में भी सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास विकसित होगा।
पहली बार इसी वर्ष से मिलेगा पुरस्कार
‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ के तहत चयनित बच्चों को इसी वर्ष से सम्मानित किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। योजना के माध्यम से सरकार बच्चों के साहसिक और प्रेरणादायी कार्यों को राज्य स्तर पर पहचान देने की व्यवस्था विकसित कर रही है।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पात्र बच्चों के अभिभावक अथवा संबंधित स्तर से उनके साहसिक कार्यों से जुड़े आवश्यक विवरण प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों पर विचार कर पात्र बच्चों का चयन किया जाएगा।
बच्चों में साहस और संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर
राज्य सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बच्चों में केवल वीरता की भावना विकसित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं के प्रति भी जागरूक करना है। विपरीत परिस्थितियों में संयम, साहस और दूसरों की मदद करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित कर बच्चों के सकारात्मक व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया गया है।
इस योजना के जरिए ऐसे बच्चों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा, जिनके साहसिक कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

