देहरादून ; 1 अक्टूबर 2026,
देहरादून। उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने को लेकर शासन ने निगरानी व्यवस्था और कड़ी करने के संकेत दिए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी परियोजना की प्रगति केवल कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। काम की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जहां गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां देरी के कारणों को चिन्हित कर तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने प्रत्येक परियोजना के लिए तय लक्ष्य और समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
शारदा रिवरफ्रंट की धीमी गति पर जताई नाराजगी
शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर परियोजना की प्रगति बैठक में प्रमुख मुद्दों में रही। करीब दस महीने में लगभग 10 प्रतिशत काम पूरा होने पर मुख्य सचिव ने कार्यदायी संस्था यूपी़ीडीसीसी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने परियोजना को गति देने के लिए अलग से प्रोजेक्ट मैनेजर तैनात करने को कहा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रोजेक्ट मैनेजर की तैनाती सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि अधिकारी नियमित रूप से साइट पर मौजूद रहकर निर्माण कार्यों की निगरानी करें। इससे मौके पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान करने और काम की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हर प्रोजेक्ट की प्रगति अब पर्ट चार्ट से होगी ट्रैक
यूआईआईडीबी के सभी प्रोजेक्ट्स के लिए पर्ट चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें परियोजना के प्रत्येक चरण और उसके लिए निर्धारित समय को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा। आगामी बैठकों में अधिकारियों को इसी समयसीमा के आधार पर परियोजनावार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि यदि कोई परियोजना निर्धारित कार्यक्रम से पीछे चल रही है तो उसकी वजह स्पष्ट होनी चाहिए। संबंधित स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आगे की समयसीमा प्रभावित न हो। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन को यूआईआईडीबी की योजनाओं की नियमित समीक्षा करने को भी कहा।
रिवर राफ्टिंग परियोजनाओं के संचालन के लिए बनेगी समर्पित टीम
बैठक में रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट से संबंधित कार्यों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने यूपी़ीडीसीसी को अगले पांच वर्षों के लिए संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए अपनी अलग टीम तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह टीम कार्यस्थल पर उपलब्ध रहे, जिससे परियोजनाओं के संचालन में आने वाली दिक्कतों का तुरंत निस्तारण किया जा सके। हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए अलग-अलग यूनिट तैयार करने को कहा गया है, ताकि दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं की निगरानी और रखरखाव व्यवस्थित तरीके से हो सके।
कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर समयसीमा तय
कुंभ मेला 2027 को देखते हुए हरिद्वार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने सती कुंड से जुड़े काम को 15 दिसंबर तक पूरा कराने के लिए अतिरिक्त श्रमिक लगाने और जरूरत के अनुसार कार्य शिफ्ट बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि काम में तेजी जरूरी है, लेकिन इसके साथ निर्माण की गुणवत्ता भी बरकरार रहनी चाहिए। अधिकारियों को समय और गुणवत्ता दोनों मानकों पर निगरानी रखने को कहा गया।
हरिद्वार में रहकर निगरानी करेगा कार्यदायी संस्था का महाप्रबंधक
हरिद्वार में चल रही परियोजनाओं की जमीनी निगरानी को मजबूत करने के लिए कार्यदायी संस्था के महाप्रबंधक को हरिद्वार में ही रहकर कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। महाप्रबंधक को परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट नियमित रूप से जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जरूरी आदेश तत्काल जारी करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
पार्किंग परियोजनाओं पर भी अपनाया जाएगा जरूरत आधारित मॉडल
हरिद्वार में प्रस्तावित सरफेस, अंडरग्राउंड और मैकेनिकल पार्किंग योजनाओं को लेकर भी बैठक में दिशा-निर्देश जारी किए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि नए पार्किंग प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जिलाधिकारी और मेलाधिकारी से लिखित एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा पार्किंग की योजनाओं को अन्य विभागों की प्रस्तावित परियोजनाओं से जोड़कर देखा जाए, ताकि एक ही क्षेत्र में अलग-अलग योजनाओं के बीच टकराव की स्थिति न बने। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पार्किंग के लिए उसी विकल्प का चयन किया जाए, जो संबंधित स्थान की जरूरत, उपलब्ध जगह और व्यवहारिक परिस्थितियों के हिसाब से उपयुक्त हो।
वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए बनेगी अलग कमेटी
यूआईआईडीबी के प्रोजेक्ट्स में वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए फाइनेंसियल एवं ऑडिट कमेटी गठित करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं में खर्च से लेकर ऑडिट तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रामन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सी. रविशंकर, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते समेत संबंधित विभागों और यूआईआईडीबी के अधिकारी मौजूद रहे।

