26 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वरिष्ठ लेखकों और साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस दौरान राज्य के समग्र विकास, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, साहित्य के विस्तार और नई पीढ़ी को अपनी भाषा एवं परंपराओं से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार केवल शब्दों के सृजनकर्ता नहीं होते, बल्कि समाज की सोच और दिशा तय करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का आईना होने के साथ-साथ सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी है। इसलिए राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।
संवाद के दौरान प्रदेश के साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके साहित्यिक कार्यों, वर्तमान लेखन और अनुभवों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने साहित्यकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं समाज को जागरूक करने और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
बैठक में उपस्थित लेखकों ने भी राज्य में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्थानीय भाषाओं और लोक साहित्य के संरक्षण, युवा रचनाकारों को प्रोत्साहन तथा साहित्यिक आयोजनों के विस्तार को लेकर अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी और साहित्यिक वातावरण को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहां साहित्य, संस्कृति और उत्तराखंड के भविष्य को लेकर सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि साहित्यकारों के अनुभव और मार्गदर्शन से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

