देहरादून ; 10.09.2026।
हैदराबाद। उत्तराखण्ड की प्राकृतिक खूबसूरती और अनुकूल फिल्म नीति ने एक बार फिर देश के फिल्म निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हैदराबाद में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ में उत्तराखण्ड ने फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के तौर पर अपनी संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान दक्षिण भारतीय फिल्म जगत से जुड़े निर्माताओं और निर्देशकों ने उत्तराखण्ड में शूटिंग की सुविधाओं, सरकारी सहयोग और फिल्म नीति को लेकर विशेष रुचि दिखाई।
चेन्नई के बाद हैदराबाद में हुए आयोजन में भी उत्तराखण्ड की फिल्म नीति चर्चा के केंद्र में रही। खासतौर पर फिल्मांकन की अनुमति के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, प्राकृतिक लोकेशन और राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सहायता को फिल्म निर्माताओं के लिए उपयोगी बताया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान सहित कई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। एग्जिबिटर के तौर पर प्रसार भारती वेब्स ओटीटी, उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद और महाराष्ट्र सीडीसी ने अपनी-अपनी फिल्म एवं शूटिंग संबंधी नीतियों और संभावनाओं को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत नेटवर्किंग सत्र के साथ हुई। इसके बाद एग्जिबिटर्स ने वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों में फिल्मांकन के लिए उपलब्ध संसाधनों, लोकेशन और सुविधाओं की जानकारी साझा की। प्रस्तुतियों के बाद फिल्म निर्माताओं और प्रतिनिधियों के बीच सीधी बातचीत हुई, जिसमें शूटिंग डेस्टिनेशन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई।
कई बड़े प्रोडक्शन हाउस ने दिखाई दिलचस्पी
कॉन्क्लेव के दौरान हैदराबाद के कई प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के निर्माता और निर्देशक मौजूद रहे। उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को लेकर वेथायोग पिक्चर्स, फ्रैम्स क्राफ्ट, पीपल मीडिया फैक्ट्री, बरकत स्टूडियो, पिक्सेल्स एंड स्ट्रिंग, पीएलआईएल प्रोडक्शंस, दिल राजू प्रोडक्शंस, टीसीए, प्राइमशो एंटरटेनमेंट, जीआरके एंटरटेनमेंट, वार्फ स्ट्रीट स्टूडियो, मैत्री मूवी मेकर्स, ओमेगा क्रिएशन्स और स्टार ऑर्बिट स्टूडियोज़ जैसे प्रोडक्शन हाउस के प्रतिनिधियों ने रुचि दिखाई।
बैठकों के दौरान निर्माताओं को उत्तराखण्ड की फिल्म नीति के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध शूटिंग लोकेशन, अनुमति प्रक्रिया और सरकार की ओर से मिलने वाले सहयोग को लेकर भी विस्तार से संवाद हुआ। रामोजी फिल्म सिटी के प्रतिनिधियों ने भी उत्तराखण्ड को फिल्मांकन के संभावित गंतव्य के रूप में लेकर सकारात्मक रुचि व्यक्त की।
देश-विदेश के निर्माताओं तक पहुंचाने पर जोर
उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने कॉन्क्लेव में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को बताया कि उत्तराखण्ड को एक प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविध प्राकृतिक लोकेशन हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर नदियों, जंगलों, मैदानी इलाकों और ग्रामीण परिवेश तक राज्य में अलग-अलग तरह की कहानियों के अनुरूप शूटिंग लोकेशन उपलब्ध हैं। फिल्म निर्माताओं को इन स्थानों तक पहुंच, अनुमति और अन्य जरूरी सुविधाओं के संबंध में भी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
के.एस. चौहान ने उत्तराखण्ड की फिल्म नीति के प्रमुख प्रावधानों के साथ ही सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था की जानकारी भी साझा की। इसका उद्देश्य फिल्म निर्माताओं के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना और शूटिंग से जुड़ी औपचारिकताओं को कम समय में पूरा कराने में मदद करना है।
धामी सरकार की नीति से मजबूत हो रहा फिल्म टूरिज्म
राज्य में फिल्मांकन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में लागू फिल्म नीति को फिल्म उद्योग के लिए आकर्षक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य उत्तराखण्ड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को फिल्मों के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने के साथ-साथ फिल्म टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है।
हैदराबाद कॉन्क्लेव में मिली प्रतिक्रिया को इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यदि दक्षिण भारत के बड़े प्रोडक्शन हाउस उत्तराखण्ड में अपने आगामी प्रोजेक्ट्स की शूटिंग करते हैं, तो इससे राज्य की फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन, रोजगार और इससे जुड़े सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।

