देहरादून ; 10.09.2026।
डीपीएस रानीपुर के ‘गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में मुख्य सचिव ने कहा, तकनीक के साथ संवेदनशीलता और संस्कृति से जुड़ाव भी जरूरी
हरिद्वार। दिल्ली पब्लिक स्कूल रानीपुर के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘द गोल्डन जुबली लिटरेसी फेस्टिवल-गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और आधुनिक तकनीक के बदलते स्वरूप पर सार्थक चर्चा देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ साहित्य और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक उपलब्धि उसकी भव्य इमारतों में नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाली पीढ़ियों के विचारों, संस्कारों और समाज में दिए गए योगदान से तय होती है।
मुख्य सचिव ने विद्यालय की पांच दशक लंबी यात्रा को उपलब्धि बताते हुए कहा कि किसी संस्था को वर्षों तक निरंतर आगे बढ़ाने में एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी का सामूहिक योगदान होता है। शिक्षक विद्यार्थियों को दिशा देते हैं, विद्यार्थी संस्था की पहचान बनाते हैं और अभिभावक इस पूरी व्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि डीपीएस रानीपुर की 50 वर्षों की यात्रा के पीछे भी ऐसे ही अनेक लोगों का परिश्रम, समर्पण और विश्वास जुड़ा हुआ है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में साहित्य की भूमिका अहम
आनंद बर्द्धन ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक ने सीखने, काम करने और संवाद करने के तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है। ऐसे समय में साहित्य की प्रासंगिकता कम होने के बजाय और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि तकनीक हमें सूचनाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन मानवीय संवेदना, कल्पना, विचार और जीवन के अनुभवों को समझने में साहित्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी पढ़ाई को केवल निर्धारित पाठ्यक्रम और परीक्षाओं तक सीमित न रखें। अलग-अलग विषयों की किताबें पढ़ें, अच्छे साहित्य से जुड़ें और अपने आसपास होने वाली घटनाओं को समझने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है और उसे किसी विषय को कई पहलुओं से देखने की क्षमता देती है।
हिमालय और लोक संस्कृति को समझने की जरूरत
मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड की पहचान में हिमालय और लोक परंपराओं के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की संस्कृति में सदियों का अनुभव और ज्ञान समाहित है। यहां की लोककथाएं, लोकगीत, परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर हैं। साहित्य इन परंपराओं को संरक्षित करने और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक दुनिया की जानकारी हासिल करने के साथ-साथ अपनी जड़ों को भी जानना चाहिए। अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति समझ विकसित करने से व्यक्ति अपनी पहचान को बेहतर तरीके से महसूस कर पाता है। आधुनिकता और परंपरा को एक-दूसरे का विरोधी मानने के बजाय दोनों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
विद्यार्थियों को दिए आत्ममंथन के तीन सूत्र
आनंद बर्द्धन ने विद्यार्थियों से जीवन में निरंतर आत्ममंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर खुद से तीन सवाल अवश्य पूछने चाहिए—मैंने क्या सीखा, मैंने क्या योगदान दिया और मैंने किसकी मदद की। उन्होंने कहा कि ये तीन सवाल विद्यार्थी को केवल अपनी उपलब्धियों पर ध्यान देने के बजाय अपने सीखने, सामाजिक जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का अर्थ केवल अच्छे अंक हासिल करना या व्यक्तिगत उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं है। वास्तविक सफलता तब है, जब व्यक्ति अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग स्वयं के साथ-साथ समाज के हित में भी कर सके। उन्होंने युवाओं को जिज्ञासु बने रहने, नई चीजें सीखने और अपनी क्षमताओं को सकारात्मक दिशा में लगाने की प्रेरणा दी।
पांच दशक की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान विद्यालय की पांच दशक की शैक्षणिक यात्रा और उससे जुड़ी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम ने वर्तमान और पूर्व पीढ़ियों के बीच विद्यालय की विरासत को जोड़ने का अवसर प्रदान किया। साहित्य केंद्रित आयोजन में विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा और विचारों को सामने रखने का मंच मिला।
कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए मुख्य सचिव का संबोधन प्रेरणादायी रहा। उन्होंने कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और देश के भविष्य को आकार देने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसलिए उन्हें ज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ संवेदनशीलता और आधुनिक सोच के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करना चाहिए।
समारोह में शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, डीएम मयूर दीक्षित, सीएफओ बीएचईएल राजेश कुमार द्विवेदी, कार्यकारी निदेशक बीएचईएल रंजन कुमार, प्रिंसिपल अनुपम जग्गा, वाइस प्रिंसिपल डॉ. पविंदर सिंह, वाइस प्रिंसिपल एकेडमिक्स अनुपमा श्रीवास्तव, प्रो-वाइस चेयरमैन डीपीएस रानीपुर एन. एस. राणा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने शिक्षा के साथ साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जोड़ते हुए नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने का संदेश दिया।

