9 august 2026 ; Dehradun।
भुवनेश्वर: NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी। भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि NEET विवाद के दौरान युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
प्रधान के मुताबिक, उस दौर में उनके सामने व्यक्तिगत हित का कोई सवाल नहीं था। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की उम्मीदें बहुत बड़ी हैं और यही पीढ़ी आने वाले समय में भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली है।
‘युवा देश का भविष्य हैं’
अपने संबोधन में प्रधान ने Gen Z को देश की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी सिर्फ रोजगार और शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश के भविष्य को लेकर भी अपनी स्पष्ट आकांक्षाएं रखती है। उन्होंने युवाओं की संख्या और उनकी संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे जन्म लेते हैं और आने वाले वर्षों में यही युवा देश की दिशा तय करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री पद उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि या प्रतिष्ठा का विषय नहीं था। उनके अनुसार, जिम्मेदारी मिलने पर उसे निभाना महत्वपूर्ण है, जबकि पद का बने रहना उनके लिए प्राथमिकता नहीं है।
NEET विवाद के बीच बढ़ा था दबाव
NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध तेज हुआ था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठती रही। बाद में 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधान का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर युवाओं के बीच पैदा हुए असंतोष और आंदोलन के दौरान सामने आई परिस्थितियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संकेत दिया कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी का भविष्य है।
‘पद नहीं, देश के युवाओं का भविष्य महत्वपूर्ण’
प्रधान के बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीतिक या सरकारी पद स्थायी नहीं होते, लेकिन देश की युवा पीढ़ी की उम्मीदें और भविष्य कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने Gen Z को भारत की आगामी ताकत बताते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही दिशा में इस्तेमाल देश को आगे ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
NEET विवाद के बाद उनका यह पहला विस्तृत सार्वजनिक वक्तव्य अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

